
नई दिल्ली: रबी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक, रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम समेत छह प्रमुख फसलों के MSP में बढ़ोतरी की गई है।
इन आंकड़ों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के MSP में ₹675 प्रति क्विंटल की बताई गई है। इसके बाद सरसों के MSP में ₹413 और मसूर में ₹390 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी बताई गई है। वहीं गेहूं के MSP में सिर्फ ₹25 प्रति क्विंटल का इजाफा बताया गया है।
रबी की 6 फसलों का नया MSP
| फसल | पुराना MSP | नया MSP | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| गेहूं | ₹2,585 | ₹2,610 | ₹25 |
| जौ | ₹2,150 | ₹2,286 | ₹136 |
| चना | ₹5,875 | ₹5,958 | ₹83 |
| मसूर | ₹7,000 | ₹7,390 | ₹390 |
| सरसों | ₹6,200 | ₹6,613 | ₹413 |
| कुसुम | ₹6,540 | ₹7,215 | ₹675 |
सभी दरें रुपये प्रति क्विंटल हैं।
तुलना के लिए, सरकार द्वारा घोषित 2026-27 रबी MSP में गेहूं ₹2,585, जौ ₹2,150, चना ₹5,875, मसूर ₹7,000, रेपसीड एवं सरसों ₹6,200 और कुसुम ₹6,540 प्रति क्विंटल थे।
गेहूं बेचने पर किसानों को कितने रुपये ज्यादा मिलेंगे?
अगर गेहूं का MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल माना जाए, तो पिछले ₹2,585 के मुकाबले ₹25 प्रति क्विंटल अधिक मिलेंगे।
उदाहरण के लिए:
- 100 क्विंटल गेहूं: ₹2,500 अतिरिक्त
- 100 क्विंटल सरसों: ₹41,300 अतिरिक्त
- 100 क्विंटल मसूर: ₹39,000 अतिरिक्त
- 100 क्विंटल कुसुम: ₹67,500 अतिरिक्त
हालांकि, यह सिर्फ MSP के अंतर के आधार पर गणना है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसान की पूरी उपज अनिवार्य रूप से MSP पर खरीदी जाएगी। वास्तविक आय सरकारी खरीद, बाजार भाव, गुणवत्ता और बिक्री की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
सबसे ज्यादा फायदा किस फसल के MSP में?
दिए गए आंकड़ों के अनुसार कुसुम के MSP में सबसे बड़ी बढ़ोतरी ₹675 प्रति क्विंटल है।
इसके बाद:
सरसों – ₹413
मसूर – ₹390
जौ – ₹136
चना – ₹83
गेहूं – ₹25
यानी गेहूं की तुलना में तिलहन और दलहन की कुछ फसलों के MSP में ज्यादा बढ़ोतरी बताई गई है।
MSP क्यों महत्वपूर्ण है?
MSP वह न्यूनतम समर्थन मूल्य है जिसे सरकार प्रमुख कृषि फसलों के लिए घोषित करती है। केंद्र सरकार MSP तय करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिशों समेत उत्पादन लागत, मांग-आपूर्ति, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखती है।
सरकार ने 2018-19 के बजट में MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर रखने की नीति का उल्लेख किया था।
फसल विविधीकरण पर भी जोर
MSP में दलहन और तिलहन फसलों को अपेक्षाकृत अधिक बढ़ावा देने का उद्देश्य फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना भी बताया जाता रहा है। 2026-27 के आधिकारिक फैसले में भी सरकार ने रबी फसलों के MSP बढ़ाने को किसानों को लाभकारी मूल्य देने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने से जोड़ा था।
किसान के लिए क्या मायने रखता है?
MSP में बढ़ोतरी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी मूल्य संकेत देती है, लेकिन MSP बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक किसान की पूरी फसल उसी कीमत पर खरीदी जाएगी।
किसान को वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि उसकी कितनी उपज सरकारी खरीद के तहत आती है, स्थानीय मंडी में बाजार भाव क्या है, फसल की गुणवत्ता कैसी है और खरीद की शर्तें क्या हैं।
























