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UPI Charges से कैश की वापसी का खतरा! पूर्व NITI Aayog VC राजीव कुमार ने सरकार को दी बड़ी चेतावनी

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UPI charges and new MDR rules effective from October 15 2026
₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 15 अक्टूबर से 0.4% MDR लागू होगा।

UPI Charges को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने जा रहा है। हालांकि यह शुल्क सीधे ग्राहकों से लेने के लिए नहीं है। इसी बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार से UPI को कुछ और वर्षों तक जीरो-फीस व्यवस्था में बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने आशंका जताई कि मामूली शुल्क भी डिजिटल पेमेंट के कुछ यूजर्स को वापस कैश की ओर जाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

राजीव कुमार ने क्यों जताई चिंता?

राजीव कुमार ने PTI से बातचीत में कहा कि UPI को एक ‘पब्लिक गुड’ के तौर पर देखा जाना चाहिए और फिलहाल मर्चेंट्स से भी UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लेने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, UPI के व्यापक आर्थिक और सामाजिक फायदे इसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत से ज्यादा हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा जीरो-फीस व्यवस्था को कम से कम कुछ और वर्षों तक जारी रखा जाए और बाद में करेंसी-टू-GDP अनुपात के रुझान को देखते हुए इस पर दोबारा विचार किया जाए।

क्या 15 अक्टूबर से UPI पर चार्ज लगेगा?

यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। 15 अक्टूबर से हर UPI पेमेंट पर शुल्क नहीं लगेगा।

नए MDR फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा। वहीं Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले UPI पेमेंट पर यह MDR लागू नहीं होगा।

ग्राहकों को UPI पेमेंट पर कितना देना होगा?

सरकार और पेमेंट सिस्टम से जुड़े निर्देशों के मुताबिक, MDR का बोझ ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं है। यानी अगर कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹10,000 का UPI भुगतान करता है, तो ग्राहक से अलग से ₹40 UPI चार्ज लेने की व्यवस्था नहीं है। 0.4% MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होने वाला शुल्क है।

हालांकि, सरकार ने इस व्यवस्था की निगरानी की बात भी कही है ताकि व्यापारी या पेमेंट सिस्टम के दूसरे हिस्से इसे ग्राहकों पर न डालें।

96% से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन छोटे मूल्य के

नए MDR का असर UPI के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के एक छोटे हिस्से पर पड़ेगा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ₹2,000 से कम के P2M ट्रांजैक्शन UPI के वॉल्यूम का 95% से ज्यादा हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतान नए MDR से बाहर रहेंगे।

दूसरी ओर, बड़ी रकम वाले ट्रांजैक्शन कुल डिजिटल भुगतान की वैल्यू में महत्वपूर्ण हिस्सा रखते हैं। इसी वजह से सरकार और पेमेंट इंडस्ट्री ने MDR को UPI इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और पेमेंट इकोसिस्टम की स्थिरता से जोड़ा है।

किन ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फिक्स्ड MDR?

कुछ जरूरी और कम-मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। इनमें रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कुछ यूटिलिटी जैसी श्रेणियां शामिल हैं। ₹2,000 से ज्यादा के पात्र ट्रांजैक्शन पर इन क्षेत्रों के लिए ₹5 का फिक्स्ड MDR रखा गया है।

यह भी मर्चेंट/पेमेंट इकोसिस्टम से संबंधित शुल्क है, इसे सीधे ग्राहक के UPI भुगतान शुल्क के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।

राजीव कुमार बोले- कैश की तरफ लौटने का खतरा

राजीव कुमार का कहना है कि UPI की सफलता का एक बड़ा कारण इसकी आसान और कम लागत वाली प्रकृति रही है। उनके मुताबिक अगर लोगों को छोटे या सामान्य डिजिटल पेमेंट में भी अतिरिक्त शुल्क महसूस होने लगा, तो कुछ यूजर्स पुराने कैश सिस्टम की तरफ लौट सकते हैं।

उन्होंने सरकार से फिलहाल जीरो-फीस मॉडल जारी रखने की अपील की है। यह उनका आर्थिक नीति संबंधी मत है; दूसरी ओर सरकार और UPI इकोसिस्टम से जुड़े पक्षों का तर्क है कि MDR का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।

सरकार का क्या कहना है?

सरकार की ओर से जोर दिया गया है कि नया MDR सीधे ग्राहकों पर शुल्क लगाने के लिए नहीं है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के लिए UPI का इस्तेमाल व्यापक रूप से मुफ्त बना रहेगा और शुल्क का ढांचा मुख्य रूप से मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होगा।

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और पेमेंट सिस्टम में निवेश के लिए टिकाऊ आर्थिक मॉडल तैयार करने में मदद मिल सकती है।

विपक्ष की आपत्ति भी सामने आई

UPI MDR के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ग्राहकों से UPI भुगतान के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इस तरह UPI Charges को लेकर दो अलग-अलग चिंताएं सामने आ रही हैं—एक तरफ डिजिटल भुगतान को ग्राहकों के लिए मुफ्त और व्यापक बनाए रखने की बात है, जबकि दूसरी तरफ UPI के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा खर्च के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

15 अक्टूबर से पहले जान लें ये 5 बातें

1. ₹2,000 तक के सामान्य P2M UPI भुगतान: नए 0.4% MDR के दायरे में नहीं।

2. ₹2,000 से ज्यादा के पात्र P2M भुगतान: 0.4% MDR लागू होगा।

3. ₹75,000 या उससे ज्यादा: MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।

4. Person-to-Person UPI: नया P2M MDR लागू नहीं होगा।

5. ग्राहक से सीधे UPI चार्ज: MDR को ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं है।

निष्कर्ष

15 अक्टूबर 2026 से UPI के पेमेंट इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है, लेकिन इसे “हर UPI पेमेंट पर चार्ज” कहना सही नहीं होगा। नया MDR मुख्य रूप से ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। राजीव कुमार ने इस बदलाव के संभावित व्यवहारिक असर को लेकर चिंता जताई है और सरकार से कुछ और वर्षों तक जीरो-फीस मॉडल बनाए रखने की अपील की है। दूसरी ओर सरकार इस व्यवस्था को UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता से जोड़ रही है।

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