नई दिल्ली: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों आरोपी फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश वाले मामले में यूएपीए (UAPA) के तहत आरोपी हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने कहा कि अदालत न्यायिक अनुशासन से बंधी हुई है और पहले दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव नहीं कर सकती। इसी आधार पर दोनों की जमानत याचिकाओं को खारिज किया गया।
इससे पहले 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोनों की जमानत पर दो परिस्थितियों में दोबारा विचार किया जा सकता है—संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने पर या 5 जनवरी 2026 के आदेश के एक साल पूरे होने पर, जो भी पहले हो।
करीब छह साल से जेल में हैं दोनों
उमर खालिद और शरजील इमाम फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में दोनों पर यूएपीए समेत कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जमानत के चरण में की गई टिप्पणियों को मुकदमे के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है 2020 दिल्ली दंगा मामला?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा हुई थी। इस मामले में पुलिस ने कथित बड़ी साजिश की जांच के तहत कई लोगों को आरोपी बनाया। अभियोजन पक्ष ने उमर खालिद और शरजील इमाम पर इस कथित साजिश में भूमिका होने का आरोप लगाया है। ये आरोप अभी मुकदमे के विषय हैं और अदालत में मामले की सुनवाई जारी है।
पहले भी खारिज हो चुकी है जमानत
दोनों को पहले भी अदालतों से जमानत में राहत नहीं मिली थी। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। जुलाई 2026 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने भी नियमित जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। इसके बाद मामला फिर दिल्ली हाईकोर्ट के सामने आया।
कोर्ट में आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद दोनों की हिरासत जारी रहेगी। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और ट्रायल जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश में संरक्षित गवाहों की गवाही और एक साल की समय-सीमा से जुड़ी शर्तें भी महत्वपूर्ण हैं।

























