
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब सिर्फ सवालों के जवाब या ईमेल लिखने तक सीमित नहीं रह गया है। इसका एक अनोखा उदाहरण सामने आया है, जहां ChatGPT और इंटरनेट सर्च की मदद से बिहार के एक युवक ने पंजाब के एक बुजुर्ग को उनके परिवार तक पहुंचाने में मदद की। बुजुर्ग अमृतसर में तीर्थयात्रा के दौरान अपने ग्रुप से बिछड़ गए थे और गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठकर गया पहुंच गए।
बुजुर्ग की पहचान चमन लाल के रूप में हुई है, जो लुधियाना जिले के फतेहगढ़ गुजरान गांव के रहने वाले हैं। परिवार के मुताबिक, उन्हें याददाश्त से जुड़ी परेशानी है। अमृतसर में ग्रुप से अलग होने के बाद वह रेलवे स्टेशन पहुंचे और गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए। इसके बाद वह गया पहुंच गए, जो उनके घर से करीब 1,200 किलोमीटर दूर है।
अमृतसर से गलत ट्रेन में बैठकर पहुंच गए गया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चमन लाल 11 सितंबर को पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन करने पहुंचे थे। इसी दौरान वह अपने ग्रुप से बिछड़ गए और रेलवे स्टेशन की तरफ चले गए।
रेलवे स्टेशन पर उन्होंने गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन पकड़ ली। सफर करते-करते वह गया पहुंच गए। वहां वह परेशान और भूखे नजर आ रहे थे और उन्हें अपने घर का पूरा पता भी याद नहीं था।
अजनबी नीरज ने बुजुर्ग को दिया सहारा
गया रेलवे स्टेशन के पास नीरज नाम के एक स्थानीय व्यक्ति की नजर चमन लाल पर पड़ी। बुजुर्ग अपनी पहचान और घर का पूरा पता बताने में असमर्थ थे।
नीरज उन्हें अपने घर ले गए, खाना खिलाया और करीब चार दिनों तक अपने परिवार के साथ रखा। चमन लाल को सिर्फ अपने गांव का नाम फतेहगढ़ गुजरान याद था। यही नाम उनके घर तक पहुंचने का सबसे बड़ा सुराग बना।
ChatGPT और इंटरनेट से शुरू हुई गांव की तलाश
नीरज ने फतेहगढ़ गुजरान नाम के आधार पर इंटरनेट पर खोज शुरू की। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अलग-अलग शब्दों और नामों के संयोजन के साथ इंटरनेट सर्च और ChatGPT की मदद ली।
यह तलाश तुरंत पूरी नहीं हुई। करीब तीन दिनों तक खोज करने के बाद नीरज को लुधियाना जिले में मच्छीवाड़ा साहिब के पास स्थित फतेहगढ़ गुजरान गांव के बारे में जानकारी मिली। इससे चमन लाल के घर तक पहुंचने की उम्मीद बनी।
नीरज खुद बुजुर्ग को लेकर पंजाब पहुंचे
गांव का पता मिलने के बाद भी नीरज ने चमन लाल को अकेले पंजाब भेजने का फैसला नहीं किया। वह खुद उनके साथ गया से पंजाब की यात्रा पर निकले।
लुधियाना पहुंचने के बाद वह चमन लाल को मच्छीवाड़ा साहिब इलाके में ले गए और स्थानीय लोगों को उनकी तस्वीर दिखाकर पहचान कराने की कोशिश की। आखिरकार एक स्थानीय व्यक्ति मास्टर कृष्ण लाल ने चमन लाल को पहचान लिया। इसके बाद उनके परिवार से संपर्क हो सका।
परिवार ने नीरज का जताया आभार
चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह को जब उनके दादा के सुरक्षित होने की जानकारी मिली तो वह उन्हें लेने पहुंचे। परिवार ने नीरज का आभार जताया और उनके इस प्रयास की सराहना की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार ने नीरज का स्वागत भी किया और उन्हें धन्यवाद दिया कि उन्होंने न सिर्फ बुजुर्ग को अपने घर में रखा, बल्कि उन्हें गया से पंजाब तक सुरक्षित पहुंचाने में भी साथ दिया।
परिवार अमृतसर में कर रहा था तलाश
चमन लाल के परिवार ने उनके अमृतसर से लापता होने के बाद उनकी तलाश शुरू कर दी थी। परिवार और गांव के लोगों ने उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी साझा की थी, ताकि कोई उन्हें पहचान सके।
कई दिनों बाद उनकी जानकारी गया से मिली और नीरज की मदद से वह वापस अपने परिवार तक पहुंच पाए।
ChatGPT के इस्तेमाल की कहानी क्यों खास है?
इस पूरी घटना में सबसे खास बात यह है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति, जिन्हें अपने घर का पूरा पता याद नहीं था, सिर्फ अपने गांव का नाम बता सके। उसी नाम को सुराग बनाकर नीरज ने इंटरनेट और ChatGPT की मदद से संभावित गांव की पहचान की।
हालांकि, बुजुर्ग को परिवार तक पहुंचाने में सिर्फ AI की भूमिका नहीं थी। नीरज का चार दिनों तक उन्हें अपने घर में रखना, फिर खुद पंजाब तक साथ जाना और स्थानीय लोगों से पहचान करवाना इस पूरी कोशिश का अहम हिस्सा रहा।
यह घटना दिखाती है कि सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर AI टूल किसी मुश्किल परिस्थिति में जानकारी खोजने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन अंतिम पुष्टि के लिए स्थानीय लोगों और वास्तविक स्रोतों से सत्यापन जरूरी रहता है।
























