डायबिटीज की जांच के लिए आमतौर पर ब्लड टेस्ट की जरूरत पड़ती है। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सिर्फ 20 सेकंड की आवाज की रिकॉर्डिंग से टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम के संकेत पहचानने की संभावना सामने आई है।
ऑस्ट्रेलिया की RMIT University और हेल्थ-टेक कंपनी thymia के शोधकर्ताओं ने ऐसा AI मॉडल विकसित किया है, जो इंसान की आवाज में मौजूद बेहद सूक्ष्म पैटर्न का विश्लेषण करके टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े जोखिम संकेतों की पहचान करने की कोशिश करता है। यह शोध सितंबर 2026 में European Association for the Study of Diabetes (EASD) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया जा रहा है।
हालांकि, इसे अभी डायबिटीज की अंतिम जांच या diagnosis नहीं माना जा सकता। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसका संभावित इस्तेमाल पहले चरण की screening के तौर पर किया जा सकता है, जिसके बाद ब्लड टेस्ट से स्थिति की पुष्टि की जाएगी।
कैसे आवाज से डायबिटीज का पता लगाने की कोशिश हो रही है?
शोधकर्ताओं का मानना है कि टाइप-2 डायबिटीज शरीर में कई तरह के बदलावों से जुड़ी होती है। इनमें आवाज, सांस पर नियंत्रण और बोलने के तरीके में आने वाले बेहद सूक्ष्म बदलाव भी शामिल हो सकते हैं।
इन बदलावों को सामान्य तौर पर इंसान का कान आसानी से नहीं पहचान पाता। AI मॉडल आवाज की रिकॉर्डिंग में मौजूद अलग-अलग acoustic patterns का विश्लेषण करता है और उन्हें डायबिटीज से जुड़े डेटा के साथ मिलाकर जोखिम का अनुमान लगाता है।
रिसर्च में आवाज की गुणवत्ता, बोलने के तरीके और सांस तथा आवाज के नियंत्रण से जुड़े संकेतों पर ध्यान दिया गया।
21 हजार से ज्यादा लोगों की आवाज पर तैयार हुआ मॉडल
रिपोर्ट के अनुसार, AI मॉडल को 21,129 लोगों की 63,283 voice recordings के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया। ये प्रतिभागी ब्रिटेन और अमेरिका से थे।
इसके बाद मॉडल को छोटे voice recordings पर टेस्ट किया गया। प्रतिभागियों से लगभग 20 सेकंड की आवाज रिकॉर्ड कराई गई, जिसमें उन्हें एक छोटा टेक्स्ट पढ़ना था।
शोधकर्ताओं ने इसके बाद AI के अनुमान की तुलना लोगों द्वारा बताए गए डायबिटीज इतिहास और एक हिस्से में किए गए HbA1c blood tests से की।
ब्लड टेस्ट से तुलना में क्या सामने आया?
HbA1c टेस्ट वाले 801 प्रतिभागियों के डेटा में मॉडल ने डायबिटीज वाले लोगों को बिना डायबिटीज वाले लोगों की तुलना में ज्यादा risk score देने की क्षमता 75% मामलों में दिखाई।
इस विश्लेषण में मॉडल की sensitivity लगभग 82% रही। यानी ब्लड टेस्ट से डायबिटीज की पुष्टि वाले करीब 82% लोगों को AI ने high-risk समूह में पहचाना।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात भी सामने आई—false-positive rate 47% था। यानी कुछ ऐसे लोगों को भी high-risk बताया गया, जिन्हें डायबिटीज नहीं थी। इसलिए इसे अकेले diagnosis के तौर पर इस्तेमाल करना अभी उचित नहीं है।
क्या आवाज का टेस्ट ब्लड टेस्ट की जगह ले लेगा?
अभी नहीं।
शोधकर्ताओं ने खुद स्पष्ट किया है कि voice-based AI screening को फिलहाल blood test का replacement नहीं माना जाना चाहिए। इसका संभावित इस्तेमाल उन लोगों को पहचानने में हो सकता है जिन्हें आगे HbA1c या अन्य जरूरी जांच कराने की सलाह दी जाए।
इसका फायदा यह हो सकता है कि भविष्य में मोबाइल फोन या ऐप के जरिए शुरुआती screening की जा सके और ज्यादा लोगों तक जांच की सुविधा पहुंचाई जा सके।
आवाज में आखिर क्या बदलाव देखा जाता है?
शोध के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े कुछ शारीरिक बदलाव आवाज पर असर डाल सकते हैं। इनमें hoarseness, roughness और सांस तथा आवाज को नियंत्रित करने में बदलाव जैसे संकेत शामिल हो सकते हैं।
AI इन बेहद सूक्ष्म बदलावों को एक साथ देखकर risk pattern तैयार करता है। यानी यह किसी एक शब्द या आवाज के सुनने में अलग लगने पर डायबिटीज घोषित नहीं करता, बल्कि बड़ी मात्रा में डेटा से सीखे गए पैटर्न का विश्लेषण करता है।
इस टेक्नोलॉजी से किसे फायदा हो सकता है?
अगर आगे clinical validation में यह तरीका सफल रहता है, तो voice screening का इस्तेमाल शुरुआती स्तर पर उन लोगों को पहचानने के लिए किया जा सकता है जिन्हें आगे ब्लड टेस्ट की जरूरत हो सकती है।
खासकर ऐसे लोगों तक screening पहुंचाने में मदद मिल सकती है जो नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल या क्लिनिक नहीं पहुंच पाते।
Thymia के अनुसार, भविष्य में फोन कॉल या ऐप के जरिए voice sample लेकर screening की संभावना पर काम किया जा रहा है।
अभी इस रिसर्च की सबसे बड़ी सीमा क्या है?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह तकनीक अभी clinical validation के दौर में है। शोधकर्ताओं ने भी आगे वास्तविक clinical settings में इसकी जांच करने और अलग-अलग आबादी में इसके प्रदर्शन को समझने की जरूरत बताई है।
इसके अलावा false positives की संख्या भी महत्वपूर्ण है। इसलिए केवल AI voice screening के आधार पर किसी व्यक्ति को डायबिटीज होने या न होने का फैसला नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
20 सेकंड की आवाज से टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम संकेत पहचानने वाली AI तकनीक मेडिकल स्क्रीनिंग के क्षेत्र में एक दिलचस्प विकास है। शुरुआती शोध में इसके उपयोग की संभावना दिखाई गई है, लेकिन डायबिटीज की पुष्टि के लिए अभी भी चिकित्सकीय जांच और ब्लड टेस्ट जरूरी हैं।
यानी फिलहाल इसे “20 सेकंड में डायबिटीज की पक्की जांच” कहना सही नहीं होगा। बेहतर तरीके से इसे “20 सेकंड की आवाज से डायबिटीज के जोखिम की AI screening” कहा जा सकता है।

























