कौन हैं बुधिराम? महराजगंज में बुजुर्ग के ‘महिषासुर रूप’ का दावा, नागपंचमी पर चारा खाते दिखे

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    कौन हैं बुधिराम? महराजगंज में बुजुर्ग के ‘महिषासुर रूप’ का दावा, नागपंचमी पर चारा खाते दिखे
    कौन हैं बुधिराम? महराजगंज में बुजुर्ग के ‘महिषासुर रूप’ का दावा, नागपंचमी पर चारा खाते दिखे

    उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कोल्हुई थाना क्षेत्र के रुद्रपुर शिवनाथ गांव में 70 वर्षीय बुजुर्ग बुधिराम को लेकर दावा किया जा रहा है कि नागपंचमी के मौके पर हर तीन साल में उनके शरीर में ‘महिषासुर’ का आगमन होता है। इस दौरान उनके व्यवहार में कथित तौर पर बदलाव देखने को मिलता है।

    इस बार भी नागपंचमी के अवसर पर बुधिराम को लेकर ऐसा ही दावा सामने आया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग उनके घर पर जुटे। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में वह मवेशियों के नाद में मुंह डालकर चारा और भूसा खाते हुए नजर आ रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में बुधिराम कथित तौर पर मवेशियों की तरह चारा खाते दिखाई दे रहे हैं। उनके इस व्यवहार को लेकर ग्रामीणों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    स्थानीय लोगों और परिजनों का दावा है कि बुधिराम के साथ इस तरह की घटना लंबे समय से होती आ रही है और करीब तीन साल के अंतराल पर नागपंचमी के दौरान उनके व्यवहार में ऐसा बदलाव देखने को मिलता है।

    कौन हैं बुधिराम?

    बुधिराम महराजगंज के रुद्रपुर शिवनाथ गांव के रहने वाले हैं और उनकी उम्र करीब 70 वर्ष बताई जा रही है। वह उत्तर प्रदेश रोडवेज विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं।

    उनके परिवार और कुछ ग्रामीण इस घटना को धार्मिक आस्था और दैवीय शक्ति से जोड़कर देखते हैं। दावा किया जाता है कि बुधिराम के इस कथित ‘महिषासुर रूप’ को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचते हैं।

    मन्नत पूरी होने का भी दावा

    ग्रामीणों के बीच यह मान्यता भी बताई जा रही है कि बुधिराम के इस रूप के दर्शन करने और मन्नत मांगने से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी मान्यता के चलते नागपंचमी के मौके पर उनके घर के आसपास काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए।

    हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे आस्था और धार्मिक विश्वास से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ इसे अंधविश्वास या किसी अन्य कारण से जोड़कर देख रहे हैं।

    फिलहाल ‘महिषासुर के आगमन’ का दावा स्थानीय लोगों और परिजनों की मान्यता पर आधारित है। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

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