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पंजाब के स्कूलों में बड़ा बदलाव! बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए अब होगी काउंसलिंग, सरकार ने दिए निर्देश

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पंजाब के स्कूलों में छात्रों के लिए मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के बाद पंजाब के स्कूलों में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर काउंसलिंग व्यवस्था पर सरकार ने कार्रवाई शुरू की।

पंजाब के स्कूलों में विद्यार्थियों की मानसिक सेहत को लेकर सरकार ने कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से छात्रों की मानसिक सेहत और आत्महत्या की रोकथाम से जुड़े दिशा-निर्देशों के बाद अब पंजाब में भी इस मुद्दे को लेकर शिक्षा विभाग स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

मामला कांग्रेस नेता और पंजाब ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के पूर्व डायरेक्टर एडवोकेट रविश कुमार शर्मा की ओर से पंजाब सरकार को भेजे गए लीगल नोटिस से जुड़ा है। शर्मा ने 18 सितंबर 2026 को सरकार के सामने स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं और काउंसलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी थी।

क्या है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन?

सुप्रीम कोर्ट ने Sukdeb Saha बनाम State of Andhra Pradesh मामले में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। दिशा-निर्देशों में शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य नीति, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों तक तत्काल पहुंच जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है

कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक 100 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले शैक्षणिक संस्थानों में कम से कम एक योग्य काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सोशल वर्कर की नियुक्ति का प्रावधान भी बताया गया है।

लीगल नोटिस के बाद शिक्षा विभाग ने लिया संज्ञान

रविश कुमार शर्मा की ओर से भेजे गए नोटिस में पंजाब सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने की मांग की गई थी। इसके बाद स्कूल शिक्षा मंत्री के कार्यालय की ओर से शिक्षा विभाग को मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

इसके बाद पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने डायरेक्टर, स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT), पंजाब, मोहाली को पत्र भेजकर मामले में आगे की जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

विभाग की ओर से कार्रवाई की रिपोर्ट संबंधित एडवोकेट और रविश राज शर्मा को उपलब्ध कराने के साथ सरकार को भी भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

छात्रों की मानसिक सेहत पर क्यों बढ़ा फोकस?

स्कूल और कोचिंग के दौरान पढ़ाई का दबाव, परीक्षा का तनाव, भविष्य को लेकर चिंता और अन्य सामाजिक कारण विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी छात्र आत्महत्याओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकट को गंभीरता से लेते हुए संस्थानों में बेहतर सपोर्ट सिस्टम की जरूरत पर जोर दिया है।

ऐसे में स्कूलों में काउंसलर की उपलब्धता विद्यार्थियों को समय रहते अपनी परेशानियां साझा करने और उचित मार्गदर्शन हासिल करने में मदद कर सकती है।

पंजाब में आगे क्या होगा?

अब शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में आगे की प्रक्रिया और कार्रवाई रिपोर्ट तैयार किए जाने की उम्मीद है। यदि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था लागू होती है, तो पंजाब के स्कूलों में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर संस्थागत स्तर पर ज्यादा व्यवस्थित सहायता मिल सकती है।

फिलहाल इस मामले में सरकार की ओर से उठाए गए प्रशासनिक कदम को स्कूलों में छात्र मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में शुरुआती कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

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