
किसी के पास महंगे रनिंग शूज थे, कोई फल और पानी लेकर मैदान पहुंचा था, लेकिन रामगढ़ की 28 वर्षीय कविता देवी के पास सिर्फ एक सपना था—होमगार्ड की नौकरी। पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही कविता ने साड़ी में नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
कविता देवी रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली हैं। 4 अक्टूबर को सिदो-कान्हू मैदान में आयोजित होमगार्ड भर्ती प्री-ट्रायल में उन्होंने हिस्सा लिया। संसाधनों की कमी के बावजूद कविता ने करीब 6 मिनट 45 सेकंड में 1600 मीटर की दौड़ पूरी की।
‘शर्म लग रही थी, सब लोग देख रहे थे’
कविता ने बताया कि मैदान में दौड़ने के दौरान उन्हें काफी संकोच हो रहा था। उनकी चप्पल टूट चुकी थी और दौड़ने के लिए जूते नहीं थे। वह कहती हैं कि उन्हें डर था कि लोग क्या कहेंगे, लेकिन नौकरी की जरूरत उनसे ज्यादा बड़ी थी।
व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्होंने साड़ी में ही नंगे पांव दौड़ने का फैसला किया।
दूसरे अभ्यर्थियों को देखकर हुई घबराहट
कविता के मुताबिक वह उस दिन सुबह बिना खाना खाए ही मैदान पहुंच गई थीं। दूसरे अभ्यर्थियों के साथ उनके परिवार के लोग आए थे। कोई केला खा रहा था तो कोई सेब, जबकि कुछ लोगों के पास पानी की बोतल भी थी।
इन सबको देखकर कविता के मन में सवाल आया कि क्या वह खाली पेट दौड़ पूरी कर पाएंगी। उन्हें चक्कर आने का डर भी था। फिर भी उन्होंने खुद को संभाला और मैदान में उतर गईं।
पति की मौत के बाद बदल गई पूरी जिंदगी
कविता के पति का करीब तीन साल पहले निधन हो गया था। पति के इलाज में काफी पैसा खर्च हुआ, जिसके चलते परिवार पर कर्ज भी चढ़ गया। इसके बाद कविता के सामने अपने बच्चों की परवरिश और परिवार को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई।
कविता के दो बच्चे हैं—एक बेटा और एक बेटी। उनके बुजुर्ग ससुर खेती का थोड़ा-बहुत काम कर लेते हैं, लेकिन उम्र की वजह से भारी काम नहीं कर सकते।
खेत और ईंट-भट्ठा ही बना सहारा
कविता परिवार का पेट पालने के लिए खेतों में काम करती हैं। धान रोपाई के मौसम में उन्होंने खेतों में मजदूरी की और फसल कटाई के समय भी काम करने की तैयारी है।
जब ईंट-भट्ठे पर काम मिलता है तो कविता वहां भी मजदूरी करती हैं। उनका कहना है कि घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि खेती से केवल खाने-पीने भर का इंतजाम हो पाता है।
अब जूते और ट्रैकसूट के साथ तैयारी
कविता की कहानी सामने आने के बाद डुमरी विधायक जयराम महतो ने उनसे फोन पर बातचीत की। उन्होंने कविता के संघर्ष की सराहना करते हुए उनकी मदद की और उन्हें जूते व ट्रैकसूट उपलब्ध कराया।
कविता अब अपने होमगार्ड बनने के सपने को पूरा करने की तैयारी में हैं। उनका सपना है कि नौकरी मिलने के बाद वह अपने बच्चों को बेहतर जिंदगी दे सकें।
कविता की कहानी यह बताती है कि सुविधाओं की कमी किसी के सपनों को रोक नहीं सकती, अगर हौसला मजबूत हो।


























