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मौसम बदलते ही क्यों बीमार पड़ जाते हैं लोग? जुकाम-खांसी से बचने के 5 आसान उपाय नोट कर लें

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मौसम बदलने पर जुकाम खांसी और एलर्जी से बचाव के 5 हेल्थ टिप्समौसम बदलने पर जुकाम खांसी और एलर्जी से बचाव के 5 हेल्थ टिप्स
मौसम बदलते ही बढ़ने लगती हैं जुकाम, खांसी और एलर्जी जैसी परेशानियां, जानें बचाव के आसान तरीके।

मौसम में बदलाव के साथ कई लोगों को अचानक जुकाम, खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना, सिरदर्द या थकान जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। कई बार एक दिन तक व्यक्ति बिल्कुल ठीक रहता है और अगले ही दिन सर्दी-जुकाम या वायरल जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मौसम बदलते ही शरीर बीमार क्यों पड़ने लगता है?

दरअसल, मौसम बदलने के दौरान तापमान, नमी और वातावरण में मौजूद एलर्जेंस में बदलाव हो सकता है। इसके साथ ही कई तरह के श्वसन वायरस और एलर्जी की समस्या भी लोगों को प्रभावित कर सकती है। CDC के मुताबिक, सामान्य सर्दी कई अलग-अलग श्वसन वायरस के कारण हो सकती है और यह साल के किसी भी समय हो सकती है। वहीं कुछ वायरस, जैसे फ्लू और RSV, ठंड के मौसम में आम तौर पर ज्यादा फैलते हैं।

मौसम बदलने पर शरीर पर क्या असर पड़ता है?

तापमान में अचानक बदलाव से कुछ लोगों को सांस की नली और गले में परेशानी महसूस हो सकती है। इसके अलावा हवा में मौजूद धूल, परागकण और फफूंद जैसे एलर्जेंस छींक, नाक बहने, नाक बंद होने और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। खासतौर पर एलर्जी या अस्थमा से परेशान लोगों पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है।

यही वजह है कि मौसम बदलने के दौरान हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है। किसी को सिर्फ छींक और नाक बहने की शिकायत होती है, जबकि किसी को खांसी, गले में खराश या सांस से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

ठंड बढ़ने पर क्यों बढ़ सकता है वायरल इंफेक्शन का खतरा?

सर्दी के मौसम में कई श्वसन वायरस ज्यादा सक्रिय रूप से फैलते हैं। हालांकि सिर्फ तापमान में बदलाव को बीमारी का सीधा कारण मानना सही नहीं है। वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, खांसने-छींकने और दूषित सतहों के जरिए भी फैल सकते हैं।

इसीलिए मौसम बदलने के साथ अगर आसपास वायरल इंफेक्शन फैला हुआ है, तो संक्रमण से बचाव के लिए हाथों की सफाई, खांसते-छींकते समय मुंह ढकना और बीमार व्यक्ति से उचित दूरी रखना जरूरी है।

मौसम बदलने पर कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं?

इस दौरान आमतौर पर लोगों को:

  • जुकाम और नाक बहना
  • खांसी
  • गले में खराश
  • छींक और नाक बंद होना
  • सिरदर्द
  • हल्का बुखार
  • एलर्जी के लक्षण
  • अस्थमा के लक्षण बढ़ना

जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

पोलन यानी परागकण भी एलर्जी के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। CDC के अनुसार, पोलन के संपर्क में आने से छींक, नाक बंद होना और नाक बहना जैसे लक्षण हो सकते हैं, जबकि कुछ अस्थमा मरीजों में यह अटैक का ट्रिगर भी बन सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी या कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को मौसम बदलने के दौरान अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। अस्थमा और एलर्जी से परेशान लोगों को धूल, पोलन, धुएं और फफूंद जैसे अपने ट्रिगर्स से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

मौसम बदलने पर खुद को कैसे रखें सुरक्षित? जानें 5 आसान टिप्स

1. कपड़ों की लेयरिंग करें

तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर एक बहुत मोटे कपड़े की बजाय हल्के कपड़ों की कई परतें पहनना सुविधाजनक रहता है। जरूरत के हिसाब से कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकते हैं।

2. पानी पीना बंद न करें

ठंड के मौसम में प्यास कम लग सकती है, लेकिन शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत रहती है। अपनी जरूरत के अनुसार पानी पीते रहें।

3. हाथों की सफाई का रखें ध्यान

हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोना श्वसन संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना भी जरूरी है।

4. धूल और एलर्जी के ट्रिगर्स से बचें

अगर आपको पोलन या धूल से एलर्जी है तो ऐसे समय में इनके संपर्क को कम करने की कोशिश करें। बाहर से आने के बाद कपड़े बदलना और हाथ-मुंह धोना भी मददगार हो सकता है।

5. नींद और दिनचर्या का रखें ध्यान

मौसम बदलने पर अपनी नींद और रोजमर्रा की दिनचर्या को ज्यादा प्रभावित न होने दें। पर्याप्त आराम, संतुलित खान-पान और नियमित दिनचर्या शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर जुकाम या खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, हालत तेजी से बिगड़ना या कोई गंभीर लक्षण दिखाई दे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी का निदान या इलाज करने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

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