AISA की अध्यक्ष और छात्र नेता नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का पर्सनल बॉन्ड भरने और एक जमानतदार पेश करने को कहा गया था।
यह मामला दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ मार्च में शामिल होने जाते समय एहतियातन हिरासत में लिया गया था। उन्हें 17 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया था।
पुलिस के नोटिस में क्या कहा गया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की ओर से जारी नोटिस में नेहा बोरा को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होने और यह बताने को कहा गया था कि उनसे पूछताछ की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार क्यों न लिया जाए।
यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 126 के तहत जारी किया गया था।
नेहा बोरा ने हाईकोर्ट में क्या चुनौती दी?
नेहा बोरा की याचिका में पुलिस के नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही उन्होंने पुलिस को उनके खिलाफ किसी तरह की जबरन कार्रवाई नहीं करने का निर्देश देने की मांग भी की है।
रिपोर्ट के अनुसार, उनकी याचिका में नोटिस को अस्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत अधिकारों का सवाल उठाया गया है।
हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग
नेहा बोरा की ओर से मामले में जल्द सुनवाई की मांग किए जाने की संभावना बताई गई है। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट इस सप्ताह दशहरा अवकाश के कारण बंद है और नियमित कामकाज 26 अक्टूबर से फिर शुरू होना है।
CJP Protest से कैसे जुड़ा है मामला?
नेहा बोरा हालिया CJP से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। 16 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘Lehra Do Tiranga’ मार्च से पहले उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था और अगले दिन रिहा कर दिया गया। इसके बाद पुलिस के शांति बॉन्ड नोटिस को उन्होंने अदालत में चुनौती दी है।




























