पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी हाईकमान की नजर अब संगठन को एकजुट करने पर है। राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी के बीच सामने आ रहे मतभेदों के बीच गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक होने जा रही है।
इस बैठक में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के शामिल होने की बात सामने आई है। बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है।
पंजाब कांग्रेस में वड़िंग और चन्नी खेमों के बीच मतभेद पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में हैं। हाल के दिनों में दोनों खेमों के समर्थकों की गतिविधियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी यह खींचतान दिखाई दी है।
वड़िंग और चन्नी के बीच क्यों बढ़ी दूरी?
पंजाब कांग्रेस में मौजूदा विवाद की बड़ी वजह पार्टी के संगठन और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर नेतृत्व का सवाल माना जा रहा है।
कांग्रेस हाईकमान ने राजा वड़िंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा है, जबकि चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई है।
इसी व्यवस्था को लेकर चन्नी समर्थक खेमे की नाराजगी सामने आती रही है। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने चन्नी को पार्टी में ज्यादा बड़ी भूमिका देने और उन्हें आगामी चुनाव के लिए प्रमुख चेहरा बनाने की मांग भी की है।
पहले भी सामने आ चुकी है गुटबाजी
पंजाब कांग्रेस में वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच मतभेद अब केवल अंदरूनी बैठकों तक सीमित नहीं रहे हैं।
अगस्त में कांग्रेस के संगठनात्मक कार्यक्रमों के दौरान दोनों खेमों के समर्थकों के बीच नारेबाजी और टकराव की खबरें सामने आई थीं। कुछ कार्यक्रमों में चन्नी समर्थकों ने वड़िंग के खिलाफ नारे भी लगाए।
इसके अलावा बाबा बकाला में हुए रक्खड़ पुनिया कार्यक्रम में भी चन्नी खेमे की मजबूत मौजूदगी दिखाई दी, जबकि वड़िंग और उनके समर्थक वहां नजर नहीं आए। इससे पार्टी में चल रही खींचतान की चर्चा और तेज हुई।
दिल्ली की बैठक में क्या होगा?
गुरुवार को दिल्ली में होने वाली बैठक को इसी पृष्ठभूमि में काफी अहम माना जा रहा है।
बैठक में पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक हालात, वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
हाईकमान की कोशिश यह होगी कि चुनाव से पहले पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को कम किया जाए और सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर लाया जाए।
राहुल गांधी के पंजाब दौरे पर भी चर्चा
बैठक में राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के 11 से 13 सितंबर के बीच पंजाब आने का कार्यक्रम बन सकता है। हालांकि, उनके दौरे का अंतिम कार्यक्रम अभी हाईकमान की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
राहुल गांधी के दौरे से पहले पंजाब कांग्रेस में एकजुटता दिखाना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
AICC की टीम पहले ही पंजाब पहुंच चुकी है
राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों के लिए AICC की टीम पंजाब और चंडीगढ़ का दौरा कर चुकी है।
टीम ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठकें कर संगठन की स्थिति और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर जानकारी जुटाई है।
ऐसे में दिल्ली की बैठक के बाद राहुल गांधी के पंजाब दौरे का कार्यक्रम भी जल्द स्पष्ट होने की उम्मीद है।
2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है और कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।
पार्टी पहले ही वड़िंग और चन्नी खेमों के बीच मतभेदों को लेकर मुश्किल स्थिति का सामना कर रही है। जुलाई में भी चन्नी समर्थक नेताओं की बैठकों और वड़िंग के नेतृत्व को लेकर असहमति खुलकर सामने आई थी।
वहीं राजा वड़िंग सार्वजनिक तौर पर गुटबाजी की अटकलों को खारिज करते रहे हैं और चन्नी को सम्मानित वरिष्ठ नेता बताते हुए पार्टी को एकजुट होकर चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं।
अब हाईकमान के सामने क्या चुनौती?
कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वड़िंग और चन्नी दोनों खेमों को साथ लेकर कैसे चला जाए।
पार्टी के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2027 का चुनाव करीब आ रहा है और संगठन के भीतर लगातार होने वाली खींचतान का असर चुनावी तैयारी पर पड़ सकता है।
दिल्ली की बैठक और राहुल गांधी का संभावित पंजाब दौरा इसी कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
निष्कर्ष
Punjab Congress Crisis इस समय पार्टी हाईकमान के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों के बीच मतभेद कई मौकों पर सार्वजनिक हो चुके हैं।
अब दिल्ली की बैठक में पार्टी नेतृत्व पंजाब कांग्रेस की स्थिति पर मंथन करेगा। साथ ही राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी चर्चा हो सकती है।
अब देखना होगा कि हाईकमान वड़िंग और चन्नी के बीच चल रही खींचतान को खत्म कर कांग्रेस को एकजुट करने में कितना सफल होता है।




























