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UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर! ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर MDR टला, दिवाली के बाद आएगी नई तारीख

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UPI पेमेंट पर प्रस्तावित MDR शुल्क टलने और NPCI के नए फैसले की खबर
NPCI ने चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की तारीख दिवाली के बाद तक टाल दी है।

UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर बड़ा अपडेट आया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया है। यह व्यवस्था पहले 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी।

NPCI के UPI और Services Steering Committee ने 13 अक्टूबर को त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। यानी प्रस्तावित MDR व्यवस्था रद्द नहीं हुई है, बल्कि फिलहाल इसकी शुरुआत टाली गई है।

क्यों टला UPI MDR लागू करने का फैसला?

दिवाली के दौरान बाजारों में खरीदारी और डिजिटल पेमेंट बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में नई शुल्क व्यवस्था लागू करने से व्यापारियों और पेमेंट कंपनियों को तकनीकी और परिचालन संबंधी तैयारियों के लिए कम समय मिलता।

इसी को ध्यान में रखते हुए NPCI ने चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। इस फैसले से कारोबारियों को त्योहारों के दौरान मौजूदा व्यवस्था में भुगतान स्वीकार करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

क्या है MDR और कितना शुल्क प्रस्तावित है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी से पेमेंट प्रोसेसिंग के लिए लिया जा सकता है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए 0.4% MDR निर्धारित किया गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 है। शुल्क का वास्तविक दायरा संबंधित नियमों और छूट पर निर्भर करेगा।

क्या ग्राहकों को UPI पेमेंट पर पैसे देने होंगे?

यह सबसे अहम सवाल है। MDR का प्रस्तावित भुगतान व्यापारियों और पेमेंट इकोसिस्टम से संबंधित है। इसे ग्राहकों से सीधे वसूले जाने वाले UPI चार्ज के रूप में नहीं समझना चाहिए।

व्यक्तिगत रूप से एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में किए जाने वाले P2P UPI ट्रांसफर इस प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क के दायरे में नहीं आते। इसी तरह ₹2,000 तक के सामान्य मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए भी प्रस्तावित 0.4% MDR लागू नहीं है।

छोटे कारोबारियों और कुछ खास श्रेणियों के ट्रांजैक्शन के लिए अलग छूट या शुल्क व्यवस्था हो सकती है। इसलिए किसी भी पेमेंट पर शुल्क लागू होने की स्थिति संबंधित नियमों के अनुसार ही तय होगी।

दुकानदारों को क्या राहत मिली?

MDR लागू होने की तारीख टलने से कारोबारियों को दिवाली के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। पेमेंट कंपनियों और बैंकों को भी नई व्यवस्था लागू करने से पहले तैयारी करने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, यह राहत अस्थायी है। NPCI ने नई तारीख की घोषणा अभी अलग से किए जाने की बात कही है। इसलिए व्यापारियों को आधिकारिक अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

अब UPI यूजर्स को क्या करना चाहिए?

फिलहाल ग्राहकों को केवल इस खबर के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि हर UPI पेमेंट पर नया शुल्क लगने वाला है। MDR का प्रस्ताव चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए है और इसका भुगतान ढांचा ग्राहकों के सामान्य UPI ट्रांसफर से अलग है।

नई तारीख और लागू होने वाली अंतिम व्यवस्था की पुष्टि NPCI की आधिकारिक अधिसूचना से होगी।

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