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पंजाब की सियासत में ED रिपोर्ट से हलचल, CM ऑफिस तक पहुंची जांच के आरोप; हाईकोर्ट में कल सुनवाई

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पंजाब की सियासत में ED रिपोर्ट से हलचल, CM ऑफिस तक पहुंची जांच के आरोप; हाईकोर्ट में कल सुनवाई
पंजाब की सियासत में ED रिपोर्ट से हलचल, CM ऑफिस तक पहुंची जांच के आरोप; हाईकोर्ट में कल सुनवाई

चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल अपने विस्तृत जवाब में राज्य में कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट, सरकारी कामकाज में प्रभाव और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी ने दावा किया है कि जांच के दौरान ऐसे डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य सामने आए हैं, जिनके तार मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों तक पहुंचते हैं।

मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होनी है। इससे पहले ED ने हाईकोर्ट के सामने अपनी ओर से भेजे गए पत्रों, रिपोर्टों और अन्य दस्तावेजों का रिकॉर्ड भी रखा है।

200 पन्नों की रिपोर्ट में क्या है?

ED ने हाईकोर्ट में करीब 200 पन्नों का विस्तृत जवाब दाखिल किया है। एजेंसी के मुताबिक, उसकी जांच में सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग, टेंडर, बिल्डरों को CLU की मंजूरी, नीतिगत मामलों और हथियार लाइसेंस से जुड़े मामलों में कथित हस्तक्षेप के संकेत मिले हैं।

ED का आरोप है कि कुछ निजी लोगों और सरकारी तंत्र से जुड़े व्यक्तियों के बीच कथित तौर पर एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा था, जिसके जरिए सरकारी फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

हालांकि, ये सभी आरोप ED की जांच और रिपोर्ट में लगाए गए दावे हैं। अभी इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।

CM के OSD राजबीर सिंह घुम्मन का भी जिक्र

ED की रिपोर्ट में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन का नाम भी सामने आया है। एजेंसी का आरोप है कि निजी व्यक्ति नितिन गोहल कथित तौर पर अधिकारियों और घुम्मन के बीच बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था।

ED के मुताबिक, जांच के दौरान मिले WhatsApp चैट, दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री में सरकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित बातचीत का उल्लेख मिला।

ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित खेल का आरोप

ED ने अपनी रिपोर्ट में कई ऐसे मामलों का जिक्र किया है जिनमें सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर को प्रभावित करने के कथित प्रयासों की बात कही गई है।

एजेंसी का दावा है कि कुछ चैट में प्रस्तावित ट्रांसफर, पसंदीदा पोस्टिंग, अधिकारियों की तैनाती और विभागीय बदलाव से संबंधित बातचीत मिली है।

ED के अनुसार, कुछ संवेदनशील सरकारी जानकारी सार्वजनिक होने से पहले ही कथित तौर पर संबंधित लोगों तक पहुंच रही थी। एजेंसी इसे सरकारी रिकॉर्ड तक संभावित अनधिकृत पहुंच और जानकारी लीक होने के एंगल से भी देख रही है।

₹21 लाख की बरामदगी का भी जिक्र

ED की जांच में मई 2026 में पंजाब में की गई तलाशी भी अहम बताई गई है। एजेंसी के मुताबिक, 7 से 10 मई के बीच कई परिसरों पर तलाशी ली गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, नितिन गोहल से जुड़े परिसर की तलाशी के दौरान करीब ₹20.98 लाख की नकदी बरामद हुई थी। कुछ रिपोर्टों में इसे करीब ₹21 लाख बताया गया है।

ED का दावा है कि तलाशी के दौरान मिले मोबाइल फोन और डिजिटल सामग्री से कथित लेन-देन और सरकारी कामकाज में प्रभाव से जुड़े सुराग मिले।

पंजाब पुलिस पर ED ने क्या आरोप लगाया?

मामले का एक अहम पहलू ED और पंजाब पुलिस के बीच पत्राचार है।

ED का कहना है कि उसने पंजाब पुलिस को कई बार पत्र भेजकर मामले में FIR दर्ज करने की मांग की, लेकिन एजेंसी को FIR दर्ज होने की सूचना नहीं मिली। ED ने हाईकोर्ट के सामने जुलाई से सितंबर तक भेजे गए कई पत्रों और रिमाइंडर का रिकॉर्ड भी रखा है।

ED अब हाईकोर्ट से मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश मांग रही है।

टेंडर, CLU और हथियार लाइसेंस तक आरोप

ED की रिपोर्ट में कथित भ्रष्टाचार के दायरे को केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग तक सीमित नहीं बताया गया है।

एजेंसी के अनुसार, जांच में कथित तौर पर:

  • सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग
  • सरकारी टेंडर
  • बिल्डरों को CLU की मंजूरी
  • नीति से जुड़े मामलों
  • जमीन से जुड़े लेन-देन
  • हथियार लाइसेंस
  • सरकारी दस्तावेजों और सूचनाओं तक कथित पहुंच

जैसे मामलों से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और बातचीत की जांच की गई है।

अब 3 सितंबर को हाईकोर्ट में क्या होगा?

मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सामने है। अदालत ने पंजाब सरकार, पंजाब पुलिस, ED, CBI और पंजाब विजिलेंस ब्यूरो समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

3 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ED ने अपनी ओर से भेजे गए पत्रों और जांच से जुड़ी सामग्री अदालत के रिकॉर्ड पर रख दी है।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या सरकार को दोषी माना जाए। ED की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

क्या भगवंत मान सरकार पर बढ़ेगा दबाव?

ED की रिपोर्ट के बाद पंजाब की सियासत में इस मामले को लेकर राजनीतिक दबाव जरूर बढ़ गया है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि हाईकोर्ट 3 सितंबर की सुनवाई में क्या निर्देश देता है और पंजाब पुलिस इस पूरे मामले पर क्या रुख रखती है।

आने वाले दिनों में ED की रिपोर्ट, हाईकोर्ट की सुनवाई और संभावित FIR इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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