वंदे मातरम् पर बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस के फैसले के खिलाफ BJP ने पारित किया 10 सूत्रीय प्रस्ताव

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    वंदे मातरम् पर बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस के फैसले के खिलाफ BJP ने पारित किया 10 सूत्रीय प्रस्ताव
    वंदे मातरम् पर बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस के फैसले के खिलाफ BJP ने पारित किया 10 सूत्रीय प्रस्ताव

    नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई बैठक की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों के सामूहिक गायन से हुई।

    बैठक में भाजपा ने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो पद गाने की बात कही है। भाजपा ने इस फैसले के विरोध में 10 बिंदुओं वाला निंदा प्रस्ताव पारित किया।

    देशभर में अभियान चलाने की तैयारी

    भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर देशभर में राजनीतिक प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान चलाने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रतीक है।

    भाजपा नेतृत्व ने कांग्रेस के फैसले को राष्ट्रगीत के सम्मान और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की। पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक लाभ और वोट बैंक की राजनीति के कारण राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक विरासत से समझौता किया जा रहा है।

    महात्मा गांधी के बयान का भी होगा प्रचार

    भाजपा ने देशव्यापी अभियान के दौरान महात्मा गांधी के उस कथन को भी प्रमुखता से प्रचारित करने का फैसला किया है, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ को स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और साम्राज्यवाद-विरोधी चेतना से जुड़ा बताया था।

    पार्टी का उद्देश्य राष्ट्रगीत के इतिहास, महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका को लोगों तक पहुंचाना है।

    कांग्रेस ने 1937 के प्रस्ताव का दिया हवाला

    दूसरी ओर कांग्रेस अपने फैसले को 1937 की ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ रही है। कांग्रेस कार्यसमिति के अनुसार, पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो पदों का ही इस्तेमाल करने की परंपरा स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनी थी।

    कांग्रेस का कहना है कि अक्टूबर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर सहित उस दौर के प्रमुख नेताओं के बीच सहमति के बाद इस व्यवस्था को स्वीकार किया गया था। पार्टी का तर्क है कि वह उसी ऐतिहासिक परंपरा का पालन कर रही है।

    ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कानून का भी जिक्र

    वंदे मातरम् को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सरकार की ओर से किए गए कानूनी बदलावों के तहत राष्ट्रीय गीत को भी अपमान और जानबूझकर बाधा पहुंचाने जैसी गतिविधियों से सुरक्षा देने की बात सामने आई है।

    नए प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय गीत के सार्वजनिक अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने की स्थिति में कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है, जिसमें अधिकतम तीन साल तक की सजा हो सकती है।

    फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा ने जहां इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा है, वहीं कांग्रेस अपने फैसले को ऐतिहासिक परंपरा और 1937 के प्रस्ताव के अनुरूप बता रही है।

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