पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट को सैन्य रूप देने को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। तीनों देशों के बीच इस समझौते को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जरूरी फ्रेमवर्क, संस्थागत ढांचे और जिम्मेदारियों को लेकर तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी है।
तुर्की के शीर्ष सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने समझौते को लागू करने के कई अहम पहलुओं पर लगभग सहमति बना ली है। अब तीनों देशों की तकनीकी टीमें इसके संचालन से जुड़े तौर-तरीकों और शर्तों को अंतिम रूप देने पर काम कर रही हैं।
मक्का डिफेंस पैक्ट को कैसे लागू किया जाएगा?
मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट के तहत तीनों देशों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप देने की योजना है। इसमें संयुक्त रक्षा व्यवस्था, आपसी सैन्य तालमेल और समझौते में शामिल देशों की जिम्मेदारियों जैसे मुद्दे शामिल हैं।
तकनीकी स्तर की बैठकें अभी जारी हैं। आने वाले हफ्तों में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच इस मुद्दे पर और बैठकें होने की संभावना है। तकनीकी कमेटी की अगली बैठक अक्टूबर में पाकिस्तान में होने की संभावना जताई गई है।
रक्षा उद्योग में बढ़ेगा सहयोग
मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट सिर्फ सैन्य तालमेल तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसके तहत रक्षा उद्योग में सहयोग, संयुक्त तकनीकी विकास और उत्पादन जैसे क्षेत्रों पर भी काम करने की योजना है।
इसके अलावा तीनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी अलग-अलग सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
हूतियों पर क्या होगा असर?
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। ऐसे में मक्का डिफेंस पैक्ट को सैन्य रूप देने की प्रक्रिया को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि इस समझौते का हूतियों के खिलाफ सीधे तौर पर क्या सैन्य प्रभाव होगा। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तीनों देश सामूहिक रक्षा व्यवस्था को किस रूप में लागू करते हैं और अंतिम समझौते में सैन्य प्रतिक्रिया से संबंधित क्या प्रावधान रखे जाते हैं।
सऊदी अरब में बनेगा स्थायी सचिवालय
मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट की पहली बैठक 31 अगस्त को इस्तांबुल, तुर्की में आयोजित की गई थी। इस बैठक में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश एवं रक्षा मंत्रियों के साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल हुए थे।
बैठक में तीनों देशों के बीच सहयोग को संस्थागत बनाने और सामूहिक प्रतिरोध एवं रक्षा को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही सऊदी अरब में मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट का स्थायी सचिवालय स्थापित करने पर भी सहमति बनी।
पाकिस्तान को मिली बड़ी जिम्मेदारी
इस बैठक में पाकिस्तान को तीन साल के लिए सेक्रेटरी जनरल चुना गया। इससे पैक्ट के संचालन और तीनों देशों के बीच समन्वय में पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब तकनीकी टीमें इस रक्षा समझौते को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी संस्थागत ढांचे और संचालन संबंधी नियमों पर काम कर रही हैं।






















