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DU चुनाव रिजल्ट पर लग सकती है रोक? दिल्ली HC ने दी मतगणना रोकने की चेतावनी !

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DUSU चुनाव में हिंसा के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने मतगणना और रिजल्ट पर रोक की चेतावनी दी
DUSU चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा और नियम उल्लंघन के आरोपों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्रवाई रिपोर्ट मांगी

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU Election 2026 को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। चुनाव प्रचार के दौरान कथित हिंसा, तोड़फोड़ और लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों समेत चुनाव संबंधी नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि दिल्ली विश्वविद्यालय, पुलिस और केंद्र की ओर से की गई कार्रवाई से अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो मतगणना और चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगाई जा सकती है।

हालांकि, 17 सितंबर 2026 की सुनवाई में हाई कोर्ट ने फिलहाल मतदान को रद्द या स्थगित नहीं किया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से स्थिति रिपोर्ट मांगी है और मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

चुनाव प्रचार में हिंसा और नियम उल्लंघन के आरोप

अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा की ओर से दायर आवेदन में आरोप लगाया गया कि DUSU चुनाव प्रचार के दौरान लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों, एंटी-डिफेसमेंट गाइडलाइंस और अदालत के पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ।

याचिका में कथित हिंसा, तोड़फोड़, बाहरी लोगों की मौजूदगी और चुनाव प्रचार के दौरान नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने तस्वीरें भी पेश की गईं।

‘कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुए तो रोक देंगे मतगणना’

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली पुलिस और केंद्र से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट और उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं पाए गए तो अदालत वोटों की गिनती और परिणाम की घोषणा पर रोक लगाने जैसे कड़े आदेश पारित कर सकती है।

क्या DUSU चुनाव रद्द भी हो सकता है?

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है तो चुनाव को लेकर और कड़ा कदम उठाया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल DUSU चुनाव रद्द नहीं किया गया है।

अदालत ने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया में हिंसा और कानून के कथित उल्लंघन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट के अनुसार छात्र संघों को लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत करने में भूमिका निभानी चाहिए।

DU और पुलिस से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस से यह बताने को कहा है कि कथित हिंसा और नियम उल्लंघन के मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सुनवाई के दौरान कहा कि 16 सितंबर को हुई घटनाएं निंदनीय हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रचार समाप्त होने के बाद कैंपस में शांति है।

18 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

कोर्ट ने मामले को 18 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। छात्र संगठनों की ओर से पेश होने वाले वकीलों को भी अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।

इसलिए फिलहाल स्थिति यह है कि DUSU चुनाव पर तत्काल रोक नहीं लगी है, लेकिन अदालत ने साफ कर दिया है कि अधिकारियों की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने पर मतगणना और परिणाम की घोषणा को रोका जा सकता है।

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