India Pakistan Water Dispute: भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है। इसी बीच पाकिस्तान के एक जल विशेषज्ञ ने भारत के बांधों को लेकर चिंता जताई है। पाकिस्तानी जल विशेषज्ञ राशिद अब्बासी ने दावा किया है कि चिनाब नदी पर भारत कई बड़े बांध बना रहा है, जिससे पाकिस्तान को भविष्य में पानी और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
राशिद अब्बासी ने एक टीवी डिबेट में भारत के बगलिहार, पाकल दुल, रतले और किश्तवाड़ परियोजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने इन परियोजनाओं को पाकिस्तान के लिए बेहद गंभीर खतरा बताया और यहां तक कहा कि यह पाकिस्तान के लिए ‘डेथ वारंट’ जैसा साबित हो सकता है।
हालांकि, ये सभी आंकड़े और आशंकाएं राशिद अब्बासी के दावे हैं। इनके आधार पर भविष्य में होने वाले नुकसान को निश्चित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
चिनाब नदी पर 4 बांधों का जिक्र
पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने दावा किया कि भारत चिनाब नदी से जुड़ी परियोजनाओं के जरिए पानी के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बगलिहार बांध की क्षमता करीब 450 मेगावाट, पाकल दुल परियोजना की क्षमता करीब 1,000 मेगावाट और रतले परियोजना की क्षमता करीब 850 मेगावाट बताई।
उन्होंने एक किश्तवाड़ परियोजना का भी जिक्र किया। अब्बासी का कहना है कि इन परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान को गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है।
‘एक हफ्ते इंतजार करूंगा’
टीवी डिबेट के दौरान राशिद अब्बासी ने कहा कि वह करीब एक सप्ताह तक इंतजार करेंगे और इसके बाद अपनी व्यक्तिगत हैसियत में अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंच का रुख करने पर विचार कर सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी बांध में इस तरह से बदलाव किया जाए जिससे दूसरे देश को नुकसान पहुंचे, तो इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) का अधिकार क्षेत्र और किसी जल-विवाद को वहां ले जाने की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग कानूनी सवाल हैं। इसलिए अब्बासी की ओर से दी गई अदालत जाने की बात को फिलहाल उनके बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर के नुकसान का दावा
राशिद अब्बासी ने पाकिस्तान को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान का भी अनुमान लगाया। उन्होंने दावा किया कि पानी के प्रवाह में बदलाव से पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में खेती प्रभावित हो सकती है।
उनके मुताबिक, अगर बड़ी मात्रा में पानी पाकिस्तान की ओर आने से प्रभावित होता है तो किसानों की फसलों पर असर पड़ सकता है और पाकिस्तान को सालाना करीब 2 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
उन्होंने पानी की मात्रा को लेकर भी दावा किया कि करीब 10 से 15 लाख एकड़-फीट पानी दूसरी दिशा में मोड़े जाने की स्थिति बन सकती है।
हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है और इन्हें फिलहाल पाकिस्तानी विशेषज्ञ के अनुमान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘यह दिमाग की लड़ाई है’
राशिद अब्बासी ने भारत-पाकिस्तान के बीच पानी के विवाद को केवल सैन्य ताकत से जुड़ा मामला नहीं बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर टैंक, ड्रोन या विमान काम नहीं आएंगे, बल्कि रणनीति और विशेषज्ञता की जरूरत होगी।
उन्होंने पाकिस्तान के लिए पानी के मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसका बड़ा असर हो सकता है।
क्या है सिंधु जल संधि का विवाद?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में हुई थी। इस समझौते में सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और व्यवस्थाएं तय की गई थीं।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के साथ यह समझौता लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। पानी और बांधों से जुड़े मुद्दे को लेकर दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी-अपनी चिंताएं रखते रहे हैं।
फिलहाल पाकिस्तान में भारत की जल परियोजनाओं को लेकर चिंता और राजनीतिक बयानबाजी तेज है। राशिद अब्बासी के ताजा बयान ने इस विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।




























