पंजाब की राजनीति में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। आम आदमी पार्टी (AAP) ने मौड़ विधानसभा सीट से अपने विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी। पार्टी ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब विधायक ने सोशल मीडिया लाइव के जरिए अपनी ही सरकार के कामकाज और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर सवाल उठाए थे।
AAP पंजाब के राज्य महासचिव हरचंद सिंह बरसट की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि पार्टी को विधायक की कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता की जानकारी मिली थी। इसके बाद उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला लिया गया।
अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने के बाद कार्रवाई
सुखवीर मैसरखाना ने शनिवार को Facebook Live के जरिए पंजाब के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया था। करीब 14 मिनट के वीडियो में उन्होंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में खाली पदों को भरने की मांग की और कहा कि वह इस मुद्दे को पहले भी पार्टी नेतृत्व और सरकार के सामने उठा चुके हैं।
वीडियो के दौरान विधायक भावुक भी नजर आए। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और अपनी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों में स्टाफ की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने यहां तक कहा कि अगर पार्टी उनका टिकट काटना चाहती है तो काट सकती है।
स्कूल ऑफ एमिनेंस में शिक्षकों की कमी का मुद्दा
मैसरखाना ने रामनगर स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस को लेकर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से खाली पदों को भरने की मांग की थी।
AAP ने विधायक के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि स्कूल के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक वहां शिक्षकों की स्थिति उनके बताए आंकड़ों से अलग है। पार्टी के अनुसार स्कूल में शिक्षकों के 30 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 25 पद भरे हुए हैं, जबकि पांच पद खाली हैं।
AAP के मुताबिक स्कूल में एक प्रिंसिपल, सात लेक्चरर, मास्टर कैडर के 15 शिक्षक और कंप्यूटर साइंस के दो शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूल में कक्षा 6 से 12 तक करीब 580 विद्यार्थी 19 सेक्शन में पढ़ रहे हैं। पार्टी ने कहा कि खाली पदों को भरने के लिए स्कूल की ओर से मांग पहले ही भेजी जा चुकी है।
AAP ने विधायक के दावे को बताया गलत
पार्टी ने कहा कि स्कूल में केवल एक शिक्षक होने का दावा आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। AAP ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को सार्वजनिक बयान देने से पहले तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए।
वहीं, मैसरखाना का कहना था कि उन्होंने शिक्षकों की कमी का मुद्दा पहले भी सरकार और पार्टी नेतृत्व के सामने उठाया था। इस मुद्दे को लेकर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने उनके आरोपों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया और कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक शिक्षक पद भरे हुए हैं।
चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
AAP की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव करीब है। मैसरखाना 2022 में AAP के टिकट पर मौड़ विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे।
हालांकि, सिर्फ इस कार्रवाई के आधार पर इसके आगामी चुनावी प्रभाव के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। फिलहाल पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कार्रवाई का आधार पार्टी विरोधी गतिविधियां और अनुशासनहीनता बताया गया है।
विधायक ने सरकार और पार्टी नेतृत्व के सामने उठाई थी शिकायत
रिपोर्टों के मुताबिक मैसरखाना ने कहा था कि उन्होंने शिक्षकों की कमी का मुद्दा पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व और मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने भी उठाया था। उन्होंने दावा किया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
इसी Facebook Live के बाद उनके खिलाफ AAP की कार्रवाई सामने आई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्राथमिक सदस्यता के निलंबन के बाद पार्टी उनके खिलाफ कोई और अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी या नहीं।
क्या है पूरा मामला?
पूरे घटनाक्रम को आसान भाषा में समझें तो पहले मौड़ विधायक सुखवीर मैसरखाना ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। इसके बाद AAP ने उनके बयानों और कथित गतिविधियों को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना और उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी।
विधायक के आरोपों पर सरकार और पार्टी का पक्ष अलग है। इसलिए शिक्षकों की वास्तविक कमी और स्कूल की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल AAP की ओर से जारी कार्रवाई का पत्र ही विधायक के निलंबन का आधिकारिक आधार है।


























