दिल्ली की वोटर लिस्ट को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और चुनाव आयोग के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। AAP ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल का नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में नहीं दिखाई दे रहा है। इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई। आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक, केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम हटाए नहीं गए हैं, बल्कि उन्हें Special Intensive Revision (SIR) के दौरान verification के लिए notice जारी किया गया है।
अरविंद केजरीवाल और परिवार को क्यों मिला SIR Notice?
दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान अरविंद केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम उन मतदाताओं की सूची में आए हैं जिन्हें अपने electoral details को verify करने के लिए notice दिया गया है।
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, इन entries को “Unmapped with Last SIR” श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा voter details पिछले SIR के रिकॉर्ड से match या map नहीं हो पाईं। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को notice देकर आवश्यक दस्तावेज और जानकारी के जरिए अपनी eligibility verify करने का मौका दिया जाता है।
AAP ने क्या आरोप लगाया?
AAP ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। पार्टी ने दावा किया कि तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके अरविंद केजरीवाल का नाम वोटर लिस्ट में दिखाई नहीं दे रहा है।
AAP ने चुनाव आयोग को टैग करते हुए पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री का नाम वोटर लिस्ट से गायब हो जाए। पार्टी ने इस मामले को लेकर SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक notice मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अर्थ नहीं है।
Election Commission ने क्या कहा?
चुनाव आयोग के अधिकारी ने AAP के उस दावे को खारिज किया कि अरविंद केजरीवाल का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।
अधिकारी के मुताबिक, केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम SIR verification प्रक्रिया में हैं। उनकी entries पिछले SIR रिकॉर्ड से map नहीं होने के कारण notices जारी किए गए हैं। आवश्यक verification के बाद उनके नाम final electoral roll में शामिल किए जा सकते हैं।
यानी SIR notice को सीधे वोटर लिस्ट से नाम हटने के बराबर नहीं माना जा रहा है।
‘Unmapped’ का क्या मतलब है?
SIR के दौरान मतदाताओं के मौजूदा विवरण को पुराने electoral roll के records से मिलाया जा रहा है। जिन मतदाताओं की जानकारी पुराने रिकॉर्ड से match नहीं हो पाती, उन्हें verification के लिए notice जारी किया जा सकता है।
अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों को भी इसी unmapped category के तहत notice मिलने की जानकारी सामने आई है।
रेखा गुप्ता को भी मिला था SIR Notice
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी SIR के दौरान discrepancy वाले मतदाताओं में सामने आया था। अधिकारियों के मुताबिक, उनके मामले में उम्र से जुड़ी जानकारी में discrepancy पाई गई थी।
बाद में संबंधित दस्तावेजों की verification के बाद उनकी entry को validate कर दिया गया और उनका नाम final electoral roll में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई।
कितने मतदाताओं को भेजे गए हैं Notice?
रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं को notice जारी किए गए हैं। इनमें कई प्रमुख राजनीतिक नाम भी शामिल हैं, जिनमें अरविंद केजरीवाल और रेखा गुप्ता के अलावा अन्य नेता भी हैं।
इससे स्पष्ट है कि यह verification exercise केवल अरविंद केजरीवाल तक सीमित नहीं है।
आगे क्या होगा?
अब जिन मतदाताओं को notice मिला है, उन्हें संबंधित जानकारी और दस्तावेजों के जरिए अपनी eligibility verify करनी होगी। इसके बाद चुनाव अधिकारियों द्वारा records की जांच की जाएगी और final electoral roll तैयार की जाएगी।
चुनाव आयोग के आधिकारिक SIR schedule में दिल्ली के लिए draft electoral roll के बाद claims और objections तथा verification की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अरविंद केजरीवाल का नाम स्थायी रूप से वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। मौजूदा विवाद मुख्य रूप से SIR verification और notice को लेकर है।


























