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Yuvraj Manchanda Murder: फर्जी ED नोटिस से 1.2 करोड़ की ठगी का खुलासा, क्या इसी राज की वजह से हुई युवराज की हत्या?

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Yuvraj Manchanda murder case में fake ED notice और fraud angle की जांच
युवराज मनचंदा हत्याकांड में फर्जी ED नोटिस और करोड़ों की कथित ठगी का एंगल सामने आया

31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की गुरुग्राम में हुई हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आरोपी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा से जुड़े कथित वित्तीय मामलों की परतें भी सामने आ रही हैं। पुलिस अब इस एंगल की जांच कर रही है कि क्या युवराज को आरोपियों के कथित ठगी और एक्सटॉर्शन नेटवर्क के बारे में जानकारी हो गई थी और क्या यही हत्या की वजह बनी। हालांकि, हत्या का सटीक मकसद अभी जांच का विषय है।

युवराज 6 सितंबर को गुरुग्राम में एक कथित क्लाइंट मीटिंग के लिए गए थे। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। उनका शव 10 सितंबर को गुरुग्राम में एक नाले से बरामद हुआ था। मामले में अन्या वत्स और संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया गया है।

फर्जी ED नोटिस से कथित ठगी का मामला

पुलिस की जांच में सामने आया है कि अन्या वत्स और संयम सचदेवा पर एक पूर्व परिचित से 1.2 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित ठगी का मामला दर्ज है। आरोप है कि दोनों ने सरकारी अधिकारियों और एजेंसियों से संपर्क होने का दावा करते हुए फर्जी दस्तावेजों और नोटिस के जरिए पैसे वसूले।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दूसरे केंद्रीय सरकारी विभागों के नाम और लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया। कथित नोटिस में PMLA, NDPS Act और UAPA जैसे गंभीर कानूनों का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है।

1.2 करोड़ के बाद मांगे गए 26 करोड़

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने अपनी बचत, कर्ज और परिवार से उधार लेकर आरोपियों को 1.2 करोड़ रुपये से अधिक दिए। रिपोर्ट के मुताबिक, रकम का बड़ा हिस्सा अन्या वत्स के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाने का आरोप है।

इसके बाद कथित तौर पर उससे 26 करोड़ रुपये और मांगे गए। उसे यह बताया गया कि सरकारी एजेंसियों से जुड़े मामले को निपटाने के लिए बड़ी रकम खर्च हो चुकी है। बाद में शिकायतकर्ता को कथित धोखाधड़ी का पता चला और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

WhatsApp चैट में क्या सामने आया?

FIR में कथित WhatsApp बातचीत का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, पैसे वापस करने के दबाव के दौरान शिकायतकर्ता को एक संदेश भेजा गया था, जिसमें पत्नी को बेचने तक की बात कही गई थी।

यही कथित WhatsApp बातचीत अब जांच का अहम हिस्सा बताई जा रही है। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज चुकी है।

4.5 करोड़ की संपत्ति को लेकर भी आरोप

जांच के दौरान संयम सचदेवा से जुड़े एक अन्य मामले का भी जिक्र सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसकी अलग रह रही पत्नी ने करीब 4.5 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े कथित धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। पत्नी की शिकायत पर घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज होने की बात सामने आई है।

पुलिस अब इन सभी मामलों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि युवराज को आरोपियों की कथित गतिविधियों के बारे में क्या जानकारी थी।

क्लाइंट मीटिंग के बहाने युवराज को बुलाने का आरोप

जांच के अनुसार, हत्या वाले दिन युवराज को एक क्लाइंट मीटिंग के बहाने गुरुग्राम बुलाया गया था। युवराज ने अपने परिवार को बताया था कि उन्हें एक जरूरी मीटिंग के लिए जाना है।

रिपोर्टों के मुताबिक, वह अपनी पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स से मिलने गए थे। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद उन्हें कार के अंदर गोली मारी गई और बाद में शव को गुरुग्राम में ठिकाने लगाया गया।

हत्या के बाद भी युवराज के फोन से भेजे गए WhatsApp मैसेज

इस केस का एक और चौंकाने वाला पहलू युवराज के फोन से भेजे गए कथित मैसेज हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि उनकी मौत के बाद भी परिवार और दोस्तों को उनके फोन से मैसेज भेजे गए।

इन संदेशों के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि युवराज ठीक हैं और कहीं यात्रा कर रहे हैं। इससे परिवार को कुछ समय तक उनके जीवित होने का भ्रम रहा।

शव ठिकाने लगाने को लेकर भी जांच

पुलिस ने मामले में एक अवैध पिस्टल, युवराज की कार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इन सामानों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हत्या के बाद आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए इंटरनेट पर किसी तरह की जानकारी खोजी थी या नहीं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के उत्तराखंड भागने के दौरान उनके ठहरने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

ZIPNET पर परिवार ने उठाए सवाल

युवराज के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई और शव की पहचान से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि 10 सितंबर को गुरुग्राम में शव मिलने के बावजूद उन्हें इसकी जानकारी समय पर नहीं मिली।

परिवार ने ZIPNET पर unidentified body की जानकारी अपडेट किए जाने में कथित देरी का भी मुद्दा उठाया है। हालांकि, पुलिस ने किसी तरह की देरी के आरोप से इनकार किया है और मामले में प्रक्रियात्मक पहलुओं की जांच की जा रही है।

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल- हत्या की असली वजह क्या?

अब जांच का एक अहम सवाल यह है कि युवराज की हत्या के पीछे असली मकसद क्या था। पुलिस वित्तीय विवाद, कथित ठगी के नेटवर्क और युवराज की संभावित जानकारी—इन सभी पहलुओं को जोड़कर देख रही है।

कुछ रिपोर्टों में यह संभावना सामने आई है कि युवराज को आरोपियों की कथित गतिविधियों के बारे में जानकारी हो गई थी। हालांकि, यह अभी पुलिस की जांच का हिस्सा है और हत्या के मकसद की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।


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