
पंजाब सरकार की ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत ग्रामीणों को उनके घरों का कानूनी मालिकाना हक देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसी कड़ी में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने जिला फरीदकोट की तहसील कोटकपूरा के गांव हरी नौ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पात्र निवासियों को उनकी संपत्तियों के मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज सौंपे।
इस पहल से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से गांव की लाल लकीर यानी लाल डोरे के भीतर बने अपने मकानों में रह रहे हैं, लेकिन उनके पास संपत्ति के कानूनी मालिकाना हक से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं थे।
लाल डोरे के अंदर रहने वाले परिवारों को मिलेगा कानूनी अधिकार
कार्यक्रम के दौरान कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि पंजाब सरकार गांवों की आबादी देह यानी लाल लकीर के भीतर रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों का मालिकाना हक देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का उद्देश्य वर्षों से अपने मकानों में रह रहे परिवारों को उनकी संपत्ति की कानूनी पहचान उपलब्ध करवाना है। इससे लोगों के संपत्ति संबंधी अधिकार सुरक्षित होंगे और भविष्य में जमीन या मकान को लेकर होने वाले विवादों में भी कमी आ सकती है।
मकान के दस्तावेज मिलने से बैंक लोन लेने में भी मिलेगी मदद
स्पीकर संधवां ने बताया कि संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक मिलने से ग्रामीणों को कई तरह के फायदे हो सकते हैं। अब लाभार्थियों के पास अपने मकानों से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज होंगे, जिससे संपत्ति के अधिकारों को साबित करना आसान होगा।
इसके अलावा, आवश्यक शर्तें पूरी होने पर संपत्ति के दस्तावेजों के आधार पर बैंक से ऋण प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण परिवारों को आर्थिक जरूरतों के समय अपनी संपत्ति का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर ग्रामीणों ने जताया आभार
कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारी, स्थानीय नेता और गांव के निवासी मौजूद रहे। योजना के तहत मालिकाना हक प्राप्त करने वाले लाभार्थियों ने पंजाब सरकार का धन्यवाद किया।
ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से वे अपने घरों के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मिलने की उम्मीद कर रहे थे। अब इस दिशा में कदम उठने से उनके संपत्ति अधिकारों को सुरक्षा मिलेगी।
‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के माध्यम से गांवों में रहने वाले परिवारों को उनकी संपत्तियों की कानूनी पहचान दिलाने की पहल ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



























