पंजाब में गांवों के अंदर रहने वाले परिवारों को उनकी संपत्ति का कानूनी मालिकाना प्रमाण देने की दिशा में भगवंत मान सरकार ने बड़ी प्रगति की है। राज्य की ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत अब तक 23 जिलों के 1,377 गांवों में 2.19 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। यह जानकारी राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी।
इस योजना का उद्देश्य लाल लकीर यानी आबादी देह क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का आधिकारिक मालिकाना दस्तावेज उपलब्ध करवाना है। इसके लिए ड्रोन सर्वे के माध्यम से मकानों और प्लॉटों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
10,689 गांवों को योजना के दायरे में लाने का लक्ष्य
मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि पंजाब सरकार राज्य के सभी 10,689 गांवों में इस योजना को लागू करने के लिए काम कर रही है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को उसकी संपत्ति का रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी कार्ड उपलब्ध करवाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कई परिवार पीढ़ियों से अपने मकानों में रह रहे हैं, लेकिन उनके पास मालिकाना हक साबित करने के लिए कोई पुख्ता सरकारी दस्तावेज नहीं था। अब सरकार इस पुरानी समस्या को दूर करने की दिशा में काम कर रही है।
चार चरणों में पूरा होगा प्रॉपर्टी कार्ड वितरण
राज्य सरकार ने इस अभियान को चार चरणों में बांटा है। मंत्री के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम इस प्रकार है:
- पहला चरण: 2,284 गांवों में काम 15 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य।
- दूसरा चरण: 1,680 गांवों में नवंबर के अंत तक काम पूरा करने की योजना।
- तीसरा चरण: 1,152 गांवों में दिसंबर के मध्य तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य।
- चौथा चरण: शेष गांवों में जनवरी 2027 तक प्रक्रिया पूरी करने की योजना।
सरकार के अनुसार वितरण प्रक्रिया प्रतिदिन जारी रहेगी, ताकि सभी पात्र परिवारों तक दस्तावेज पहुंचाए जा सकें।
लाल लकीर में रहने वाले परिवारों को मिलेगा कानूनी मालिकाना हक
हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि गांवों के आबादी देह क्षेत्रों में रहने वाले अनेक परिवारों के पास दशकों से अपने मकानों के मालिकाना हक का कोई प्रमाणित सरकारी रिकॉर्ड नहीं था।
कई लोग 30 से 40 वर्षों से अपने घरों में रह रहे हैं, लेकिन संपत्ति की सीमाओं और मालिकाना हक को लेकर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस योजना के तहत तैयार होने वाला रिकॉर्ड परिवारों को उनकी संपत्ति का आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध करवाएगा।
गरीब और अनुसूचित जाति परिवारों को विशेष लाभ
मंत्री ने कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए विशेष रूप से लाभदायक साबित हो सकती है। ऐसे अनेक परिवारों के लिए आबादी देह में स्थित मकान ही उनकी एकमात्र अचल संपत्ति है।
प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद परिवार अपने मालिकाना हक का दस्तावेजी प्रमाण सुरक्षित रख सकेंगे। इससे संपत्ति संबंधी विवाद कम करने और प्रशासनिक परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रॉपर्टी कार्ड से बैंक लोन लेना भी होगा आसान
सरकार के अनुसार प्रॉपर्टी कार्ड का लाभ केवल मालिकाना प्रमाण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से संपत्ति मालिकों को बैंक ऋण लेने और संपत्ति के पंजीकरण में भी सुविधा मिल सकेगी।
इसके अलावा ग्राम पंचायतों को गांवों के सटीक नक्शे उपलब्ध होंगे, जिससे विकास कार्यों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में मदद मिलेगी।
ड्रोन सर्वे से तैयार किया जा रहा है संपत्ति का रिकॉर्ड
योजना के अंतर्गत सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा ड्रोन तकनीक से गांवों के आबादी देह क्षेत्रों का सर्वे किया जा रहा है। इसके बाद मकानों और प्लॉटों के नक्शे तैयार किए जाते हैं।
पटवारी, सर्वे अधिकारी और गांव स्तरीय समिति के सहयोग से संपत्ति मालिकों की पहचान की जाती है। प्रारंभिक नक्शे और मालिकों की सूची गांव में प्रदर्शित की जाती है, ताकि लोग अपनी जानकारी की जांच कर सकें और किसी गलती पर आपत्ति दर्ज करवा सकें।
तकनीकी कारणों से जहां ड्रोन सर्वे संभव नहीं हो सका, वहां जमीनी सत्यापन के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रॉपर्टी कार्ड में गलती होने पर कहां करें शिकायत?
मंत्री ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के प्रॉपर्टी कार्ड में नाम, विवरण या अन्य जानकारी से संबंधित गलती है तो वह अपने क्षेत्र के हलका पटवारी या तहसीलदार के पास आपत्ति दर्ज करवा सकता है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से लोग घर बैठे अपने प्रॉपर्टी कार्ड में सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे।
हरदीप सिंह मुंडियां ने लोगों से अपील की कि वे अपने कार्ड में दर्ज जानकारी को ध्यान से जांचें और किसी भी गलती को समय रहते ठीक करवाएं।




























