ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत से रिहा कर दिया है। उन्हें शुक्रवार शाम ‘लहारा दो तिरंगा मार्च’ के दौरान हिरासत में लिया गया था।
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी रिहाई की जानकारी दी और प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए अन्य लोगों को भी रिहा करने की मांग की। उन्होंने विशेष रूप से सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके की रिहाई की मांग उठाई।
‘आरके पुरम थाने में करीब 5 घंटे रखा गया’
नेहा के अनुसार, उन्हें आरके पुरम पुलिस स्टेशन में करीब पांच घंटे तक रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान लंबे समय तक उन्हें वकील से बातचीत करने की अनुमति नहीं मिली।
रिहाई के बाद सामने आए वीडियो में जब नेहा से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, ‘क्या बोलूं यार?’ इसके बाद वह आगे बढ़ गईं।
बाद में नेहा ने अपने अनुभव को विस्तार से बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर रातभर थाने में रखना और फिर अगले दिन रिहा करना किस कानूनी आधार पर किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
अभिजीत दीपके की रिहाई की मांग
नेहा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह चाहती हैं कि अभिजीत दीपके को भी रिहा किया जाए। उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान के लिए आवाज उठाना अपराध नहीं बनाया जाना चाहिए।
सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी का दावा किया और कहा कि उन्हें अदालत में पेश किया जाना है। हालांकि, उनके अनुसार उस समय अभिजीत की लोकेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
प्रदर्शन से पहले पुलिस ने दिया था नोटिस
रिपोर्ट के मुताबिक, अभिजीत दीपके को प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के लिए दिल्ली पुलिस की ओर से नोटिस दिया गया था। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला दिया गया था।
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के दौरान अभिजीत ने कथित तौर पर सवाल किया था कि उन्होंने कौन-सा कानून तोड़ा है।



























