चंडीगढ़: पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और अंदरूनी गुटबाजी खत्म करने की कवायद तेज कर दी है। पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी महासचिव सचिन पायलट ने जिम्मेदारी संभालते ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद सचिन पायलट ने मंगलवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इस बैठक में पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक हालात, पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिले सचिन पायलट
सचिन पायलट ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पंजाब कांग्रेस को मजबूत करने और आगामी चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
राहुल गांधी के अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे पर रवाना होने से पहले पायलट के साथ हुई इस मुलाकात को पंजाब कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंजाब के नेताओं से शुरू की मुलाकात
शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया है। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मंगलवार को पार्टी कार्यालय में पायलट से मुलाकात की।
दोनों नेताओं के बीच संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई।
इससे पहले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग भी पायलट से मुलाकात कर चुके हैं।
चन्नी और रंधावा समेत नाराज नेताओं को साधने की तैयारी
पंजाब कांग्रेस के अंदर लंबे समय से नेताओं के बीच मतभेद और गुटबाजी की चर्चा होती रही है। ऐसे में सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के वरिष्ठ और नाराज नेताओं को एक मंच पर लाने की होगी।
माना जा रहा है कि पायलट जल्द ही पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के सभी बड़े नेता एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने के लिए काम करें।
राहुल गांधी ने पायलट को दी खुली छूट?
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी संकट को दूर करने के लिए सचिन पायलट को जरूरी कदम उठाने की स्वतंत्रता दी गई है। पायलट सभी गुटों के नेताओं से बातचीत कर संगठनात्मक मतभेदों का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस की कोशिश है कि चुनाव से पहले पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान को खत्म कर नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया जाए।
पायलट बोले- पंजाब में कांग्रेस की होगी वापसी
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पंजाब को लेकर अपना भरोसा जाहिर किया।
उन्होंने कहा कि सामूहिक मेहनत, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की ऊर्जा के साथ कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने किसानों, युवाओं और समाज के सभी वर्गों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करने की बात कही।
2027 चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी चुनौती
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में कांग्रेस के लिए संगठन को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सचिन पायलट के सामने अब पंजाब कांग्रेस के विभिन्न गुटों के बीच तालमेल बनाने, वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर करने और जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चुनौती है।
अगर पायलट पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को कम करने में सफल रहते हैं, तो आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को इसका राजनीतिक फायदा मिल सकता है।




























