चंडीगढ़: पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। अमृतसर सिंह राजा वडिंग के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस ने पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया।
राजा वडिंग ने 2 अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। वह करीब साढ़े चार साल तक पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल के अंतिम महीनों में पार्टी के भीतर नेतृत्व और गुटबाजी को लेकर खींचतान की खबरें सामने आती रही थीं।
अब परगट सिंह के सामने प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में तैयार करने और पार्टी के अलग-अलग नेताओं के बीच समन्वय बनाने की चुनौती होगी।
2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह चन्नी बने थे CM
पंजाब कांग्रेस के मौजूदा बदलाव की तुलना 2021 के घटनाक्रम से की जा रही है। सितंबर 2021 में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था।
उस समय पंजाब कांग्रेस की कमान नवजोत सिंह सिद्धू के पास थी। मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के बीच मतभेद सार्वजनिक चर्चा का विषय बने थे।
इसके बाद 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव हुए। 117 सदस्यीय विधानसभा में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें, जबकि कांग्रेस ने 18 सीटें जीती थीं।
अब राजा वडिंग की जगह परगट सिंह
2026 में स्थिति अलग है। इस बार बदलाव मुख्यमंत्री के स्तर पर नहीं बल्कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के स्तर पर हुआ है।
कांग्रेस ने राजा वडिंग के स्थान पर परगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक परगट सिंह 2012 से जालंधर कैंट सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और चन्नी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान भी रहे हैं।
द ट्रिब्यून के अनुसार परगट सिंह पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान, पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ी हैं तथा पंजाब के पूर्व खेल एवं शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।
क्यों हो रही 2021 के दौर से तुलना?
दोनों घटनाओं के बीच तुलना की सबसे बड़ी वजह चुनाव से पहले कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव है।
2021 में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस ने पंजाब के मुख्यमंत्री को बदला था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदला गया है।
हालांकि दोनों परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। 2021 में राज्य सरकार के मुख्यमंत्री को बदला गया था, जबकि 2026 में प्रदेश संगठन के अध्यक्ष में बदलाव हुआ है।
इसलिए इसे सीधे तौर पर 2021 की पुनरावृत्ति कहना अभी जल्दबाजी होगी।
राजा वडिंग के इस्तीफे के पीछे क्या हुआ?
राजा वडिंग के इस्तीफे से पहले पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के भीतर वडिंग को हटाने को लेकर कई महीनों से खींचतान चल रही थी।
वडिंग ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस्तीफा दिया और बाद में मीडिया से बातचीत में पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट की भूमिका को लेकर अपनी धारणा भी व्यक्त की। यह उनका व्यक्तिगत बयान था, जिसकी पुष्टि कांग्रेस की ओर से उसी रूप में नहीं की गई है।
परगट सिंह के सामने क्या चुनौतियां?
परगट सिंह के सामने अब कई संगठनात्मक चुनौतियां हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के बीच समन्वय
- संगठन को विधानसभा चुनाव के लिए तैयार करना
- कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना
- चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करना
- प्रदेश कांग्रेस में गुटीय मतभेदों को संभालना
परगट सिंह ने पद संभालने के बाद कहा है कि वह पार्टी को मजबूत करने और लोगों की सेवा करने के लिए काम करेंगे।
क्या 2021 वाला असर फिर देखने को मिलेगा?
राजा वडिंग से परगट सिंह तक हुए नेतृत्व परिवर्तन को 2021 के कैप्टन-चन्नी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन दोनों परिस्थितियों में महत्वपूर्ण अंतर हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव में इस बदलाव का क्या राजनीतिक असर होगा, यह फिलहाल निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है। अभी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परगट सिंह के नेतृत्व में पंजाब कांग्रेस संगठन किस तरह काम करता है और पार्टी अपने नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के बीच कितना समन्वय स्थापित कर पाती है।


























