Ganesh Visarjan 2026: गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ गणेश उत्सव अब अपने समापन की ओर है। भगवान गणेश की पूजा के बाद भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ बप्पा को विदाई देते हैं। साल 2026 में गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। हालांकि, जिन भक्तों ने डेढ़, तीन, पांच या सात दिन के लिए गणपति की स्थापना की है, वे अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार पहले भी विसर्जन कर सकते हैं।
विसर्जन से पहले भगवान गणेश की अंतिम पूजा, आरती और भोग लगाने की परंपरा है। इसके बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हुए बप्पा को सम्मानपूर्वक विदाई दी जाती है।
गणेश विसर्जन 2026 कब है?
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को है और इसी दिन गणेश उत्सव का मुख्य विसर्जन किया जाएगा। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात से शुरू होकर 25 सितंबर की रात तक रहेगी।
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई गई थी। इसके बाद परंपरा के अनुसार भक्त डेढ़ दिन, तीसरे दिन, पांचवें दिन, सातवें दिन या अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन करते हैं।
गणेश विसर्जन 2026 का शुभ मुहूर्त
25 सितंबर को गणेश विसर्जन के लिए बताए गए प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं:
- लाभ: सुबह 07:41 बजे से 09:12 बजे तक
- अमृत: सुबह 09:12 बजे से 10:42 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:13 बजे से 01:43 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:13 बजे से 03:01 बजे तक
इन मुहूर्तों में शहर और पंचांग के आधार पर थोड़ा अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, कुछ पंचांगों में 25 सितंबर के लिए सुबह 06:11 से 10:42 बजे, दोपहर 12:13 से 1:43 बजे और शाम 4:44 से 6:14 बजे तक चौघड़िया दिए गए हैं। इसलिए विसर्जन से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग को देखना उचित है।
विसर्जन से पहले क्या करें?
गणेश जी को विदाई देने से पहले घर में अंतिम पूजा यानी उत्तर पूजा करने की परंपरा है। सबसे पहले भगवान गणेश का श्रद्धापूर्वक पूजन करें। उन्हें फूल, दूर्वा, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें।
इसके बाद गणपति को मोदक, लड्डू, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्य अर्पित करें और परिवार के साथ आरती करें।
पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल के लिए भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना करें।
गणेश विसर्जन की सही पूजा विधि
1. अंतिम पूजा करें
विसर्जन से पहले भगवान गणेश का श्रृंगार करें। चंदन, रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर पूजा करें।
2. मोदक और फल का भोग लगाएं
भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, फल और अन्य नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणेश जी की आरती करें।
3. क्षमा प्रार्थना करें
विदाई से पहले भगवान गणेश से पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें। परिवार की सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना करें।
4. बप्पा को विदाई दें
परंपरा के अनुसार कई परिवार गणपति को विदाई देते समय अक्षत, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री साथ रखते हैं। कुछ क्षेत्रों में दही-चावल का शगुन रखने की भी लोकपरंपरा है। ये रीति-रिवाज परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
5. विसर्जन के समय जयकारा लगाएं
गणेश जी की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं। विसर्जन के समय “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयकारा लगाया जाता है।
प्रतिमा को पानी में फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक और धीरे से विसर्जित करना चाहिए। पर्यावरण की दृष्टि से मिट्टी की प्रतिमा और निर्धारित कृत्रिम विसर्जन कुंड का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है। घर में विसर्जन करने वाले भक्त स्थानीय प्रशासन या नगर निकाय के निर्देशों का पालन कर सकते हैं।
गणेश विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- विसर्जन से पहले अंतिम पूजा और आरती जरूर करें।
- गणेश जी को मोदक, फल, दूर्वा और फूल अर्पित करें।
- पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
- मूर्ति को जल में फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक विसर्जित करें।
- संभव हो तो मिट्टी की प्रतिमा और पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन की व्यवस्था अपनाएं।
- स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल और नियमों का पालन करें।
- अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार शुभ समय की पुष्टि करें।
धार्मिक मान्यताएं क्षेत्र और परिवार की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
गणपति बप्पा को विदाई देने का समय
गणेश विसर्जन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्तों के लिए भावनात्मक विदाई का अवसर भी होता है। श्रद्धालु भगवान गणेश से परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं और अगले वर्ष फिर से बप्पा के आगमन की कामना करते हुए उन्हें विदाई देते हैं।
गणपति बप्पा मोरया! अगले बरस तू जल्दी आ!

























