भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO एक बार फिर बड़े मिशन के लिए तैयार है। इसरो का GSLV-F17 रॉकेट 4 सितंबर 2026 को तड़के 2:55 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरेगा। इस मिशन में भारत के अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह करीब सात महीने के अंतराल के बाद ISRO की एक बड़ी लॉन्च गतिविधि है। जनवरी 2026 में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के बाद इसरो के सामने यह अगला अहम प्रक्षेपण है।
लेकिन इस मिशन की चर्चा सिर्फ EOS-05 की वजह से नहीं हो रही। जिस रॉकेट से इसे लॉन्च किया जा रहा है, वह कभी अपने अस्थिर प्रदर्शन के कारण ‘Naughty Boy’ यानी ‘शरारती लड़का’ के नाम से मशहूर हुआ था।
आज रात 2:55 बजे होगा GSLV-F17 का लॉन्च
ISRO के आधिकारिक मिशन विवरण के मुताबिक, GSLV-F17/EOS-05 मिशन 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे IST लॉन्च किया जाना है।
रॉकेट को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के Second Launch Pad से लॉन्च किया जाएगा। यह GSLV की 19वीं उड़ान होगी।
इस मिशन के तहत EOS-05 को सीधे अंतिम भू-समकालिक कक्षा में नहीं, बल्कि Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) में पहुंचाया जाएगा।
क्या है EOS-05?
EOS-05 एक अत्याधुनिक Earth Observation Satellite है। ISRO के मुताबिक यह भारत का पहला ऐसा इमेजिंग उपग्रह है जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी के अवलोकन के लिए तैयार किया गया है।
इसका उद्देश्य बड़े क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें और निगरानी संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना है। करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाली जियोसिंक्रोनस कक्षा में काम करने के कारण यह किसी खास क्षेत्र को बार-बार देखने की क्षमता रखेगा।
इससे मौसम की निगरानी, आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यावरण और रणनीतिक निगरानी जैसे क्षेत्रों में मदद मिलने की उम्मीद है।
GSLV को क्यों कहा जाता है ‘नॉटी बॉय’?
GSLV का इतिहास पूरी तरह आसान नहीं रहा है। शुरुआती दौर में इसके प्रदर्शन में कई बार अनिश्चितता देखने को मिली। इसी वजह से इसे ‘Naughty Boy’ का उपनाम मिला।
रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती 18 उड़ानों में से 6 मिशन पूरी तरह सफल नहीं रहे थे। यही वजह है कि GSLV के हर नए मिशन पर खास नजर रहती है।
हालांकि, समय के साथ इस रॉकेट की विश्वसनीयता में काफी सुधार हुआ है। 2024 में GSLV-F14 ने INSAT-3DS को सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया था। इसके बाद ‘नॉटी बॉय’ के पुराने रिकॉर्ड को लेकर चर्चा एक बार फिर सामने आई थी।
PSLV की नाकामी के बाद क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?
इस मिशन पर नजर इसलिए भी है क्योंकि जनवरी 2026 में PSLV-C62/EOS-N1 मिशन सफल नहीं हो पाया था। इसके बाद इसरो ने PSLV से जुड़ी तकनीकी समस्या की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति भी गठित की है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। PSLV और GSLV Mk II की प्रणोदन प्रणाली अलग है। इसलिए PSLV की हालिया समस्या को सीधे GSLV-F17 की सफलता या असफलता से जोड़ना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।
यही कारण है कि GSLV-F17 मिशन को अपनी तकनीकी क्षमता के आधार पर देखा जा रहा है।
क्रायोजेनिक इंजन से जुड़ा है GSLV का पुराना इतिहास
GSLV की कहानी भारत की स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक की कहानी से भी जुड़ी हुई है।
1990 के दशक में भारत ने रूस से क्रायोजेनिक तकनीक हासिल करने की कोशिश की थी। अमेरिका ने मिसाइल तकनीक के प्रसार से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए इस तकनीक के हस्तांतरण का विरोध किया था।
इसके बाद भारत ने खुद क्रायोजेनिक तकनीक विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया। वर्षों के परीक्षण और तकनीकी चुनौतियों के बाद भारत ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने में सफलता हासिल की।
2021 में EOS-03 मिशन हुआ था असफल
GSLV का पिछला बड़ा झटका GSLV-F10/EOS-03 मिशन में लगा था। अगस्त 2021 में क्रायोजेनिक चरण में तकनीकी समस्या के कारण मिशन अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सका था।
इसके बाद GSLV-F14 ने फरवरी 2024 में INSAT-3DS को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसलिए EOS-05 मिशन GSLV की तकनीकी क्षमता और ISRO के बड़े Earth Observation कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2,367 किलो का EOS-05 क्यों है खास?
EOS-05 का वजन करीब 2,367 किलोग्राम है। यह सामान्य पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों से अलग इसलिए है क्योंकि इसे जियोसिंक्रोनस क्षेत्र से इमेजिंग के लिए डिजाइन किया गया है।
पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस कक्षा में पहुंचने के बाद उपग्रह किसी बड़े क्षेत्र को लगातार और बार-बार देखने में सक्षम होगा।
इसका फायदा खास तौर पर उन परिस्थितियों में हो सकता है जहां किसी क्षेत्र में बार-बार निगरानी और तेजी से जानकारी की जरूरत होती है।
ISRO के लिए क्यों महत्वपूर्ण है GSLV-F17 मिशन?
GSLV-F17 सिर्फ एक और लॉन्च नहीं है। यह मिशन भारत की जियोसिंक्रोनस इमेजिंग क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
साथ ही, जनवरी में PSLV-C62 मिशन की असफलता के बाद इसरो की अगली बड़ी उड़ान पर वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर है।
हालांकि GSLV और PSLV अलग-अलग रॉकेट परिवार हैं, फिर भी हर सफल लॉन्च भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में भरोसा बढ़ाने में मदद करता है।
कब और कहां देख सकते हैं GSLV-F17 लॉन्च?
ISRO के अनुसार GSLV-F17/EOS-05 मिशन का लॉन्च 4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे IST निर्धारित है। मिशन की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए ISRO ने आधिकारिक लाइव-स्ट्रीम पेज भी उपलब्ध कराया है।
लॉन्च: 4 सितंबर 2026
समय: सुबह 2:55 बजे IST
रॉकेट: GSLV-F17
उपग्रह: EOS-05
लॉन्च साइट: सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
कक्षा: Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO)
मिशन: Earth Observation
निष्कर्ष
GSLV-F17 की उड़ान ISRO के लिए एक बेहद अहम मिशन है। एक तरफ EOS-05 भारत की पृथ्वी निगरानी क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला है, वहीं दूसरी तरफ GSLV अपने पुराने ‘Naughty Boy’ वाले इतिहास से काफी आगे निकल चुका है।
अब सबकी नजर 4 सितंबर की सुबह 2:55 बजे होने वाले लॉन्च पर है। अगर मिशन सफल रहता है, तो यह भारत की जियोसिंक्रोनस इमेजिंग क्षमता के साथ-साथ ISRO के मौजूदा लॉन्च कार्यक्रम के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।




























