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मक्का तक पहुंचा हूती खतरा! सऊदी ने ड्रोन किया इंटरसेप्ट, पाकिस्तान ने क्यों बनाई दूरी?

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मक्का की ओर हूती ड्रोन खतरे के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा और पाकिस्तान के मक्का डिफेंस अलायंस की तस्वीर
मक्का की ओर ड्रोन इंटरसेप्ट किए जाने के सऊदी दावे के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।

यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव का असर अब इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का की सुरक्षा तक पहुंच गया है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसने मक्का की दिशा में आ रहे एक हूती ड्रोन को शहर के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले मार गिराया। हालांकि, हूती समूह ने इस आरोप से इनकार किया है।

मक्का के आसपास सुरक्षा को लेकर यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमले तेज किए हैं। हाल के दिनों में सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई हैं।

मक्का की सुरक्षा पर सऊदी ने जताई गंभीर चिंता

सऊदी अधिकारियों ने मक्का की ओर आने वाले ड्रोन को इंटरसेप्ट किए जाने को गंभीर सुरक्षा घटना माना है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने इसे “रेड लाइन” से जुड़ा मामला बताया, जबकि हूती पक्ष ने हमले में शामिल होने से इनकार किया।

इस घटना ने क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि मक्का दुनिया भर के मुसलमानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है।

पाकिस्तान के सामने मक्का डिफेंस अलायंस की चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान का रुख भी चर्चा में है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त 2026 में मक्का डिफेंस अलायंस के तहत सामूहिक रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई थी। समझौते का उद्देश्य सामूहिक प्रतिरोध और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 10 सितंबर को कहा था कि हूती हमलों के जवाब में तत्काल किसी सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं हुई है, हालांकि पाकिस्तान समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है।

ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इससे पहले कहा था कि यदि सऊदी अरब पर हमला संघर्ष के दायरे को बढ़ाता है, तो मक्का डिफेंस पैक्ट सक्रिय हो सकता है। उनके अनुसार समझौते के तहत किसी सदस्य पर हमला सभी सदस्यों के खिलाफ हमला माना जा सकता है।

हालांकि, पाकिस्तान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि गठबंधन का उद्देश्य क्षेत्रीय आक्रामक सैन्य अभियान चलाना नहीं है। पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) प्रमुख ने 16 सितंबर को कहा कि मक्का डिफेंस अलायंस का कोई क्षेत्रीय विस्तारवादी उद्देश्य नहीं है और यह सामूहिक प्रतिरोध के लिए है।

सऊदी ने इजरायल से क्यों मांगी मदद?

इस बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। द जेरूसलम पोस्ट के मुताबिक, सऊदी अरब और इजरायल के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड की मध्यस्थता में बातचीत हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा का फोकस हूती गतिविधियों के संबंध में खुफिया सहायता पर था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी पक्ष हूती सैन्य तैनाती और संभावित भविष्य के अभियानों को लेकर बेहतर खुफिया तस्वीर विकसित करने में सहायता चाहता था।

सऊदी और इजरायल के बीच संबंध अभी भी औपचारिक नहीं

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब और इजरायल के बीच अभी औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में हूती खतरे के बीच दोनों देशों के बीच कथित खुफिया सहयोग की खबर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है।

हालांकि, इसे दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

हूती खतरे का दायरा क्यों बढ़ रहा है?

हूती हमलों का असर केवल सऊदी सीमा तक सीमित नहीं है। हालिया घटनाक्रम में लाल सागर और बाब-अल-मंदब क्षेत्र भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। रॉयटर्स के अनुसार, हूती बलों की हालिया प्रगति ने सऊदी अरब की सुरक्षा स्थिति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ाई है।

बाब-अल-मंदब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने का असर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सऊदी अरब पर हूती हमले और बढ़ते हैं, तो मक्का डिफेंस अलायंस किस स्तर तक सक्रिय होता है। पाकिस्तान ने समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन तत्काल सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी तक स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है।

मक्का के आसपास सामने आए ताजा सुरक्षा घटनाक्रम ने इस सवाल को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

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