Home Political मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर क्या लिखा है? राहुल गांधी के दावे...

मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर क्या लिखा है? राहुल गांधी के दावे में कितना सच, जानिए श्लोकों का संदर्भ

51
0
मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर क्या लिखा है? राहुल गांधी के दावे में कितना सच, जानिए श्लोकों का संदर्भ
मनुस्मृति में महिलाओं को लेकर क्या लिखा है? राहुल गांधी के दावे में कितना सच, जानिए श्लोकों का संदर्भ

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में मनुस्मृति का जिक्र करते हुए महिलाओं की सामाजिक स्थिति को लेकर एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति के अनुसार महिला बचपन में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में अपने बेटों के नियंत्रण में रहती है।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद मनुस्मृति और उसमें महिलाओं को लेकर किए गए उल्लेख एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। ऐसे में सवाल है कि मनुस्मृति में वास्तव में महिलाओं के बारे में क्या लिखा गया है और राहुल गांधी का दावा कितनी हद तक सही है?

क्या है मनुस्मृति?

मनुस्मृति को मानव धर्मशास्त्र या मनु के नियम के नाम से भी जाना जाता है। यह संस्कृत का एक प्राचीन धर्मशास्त्रीय ग्रंथ है, जिसमें सामाजिक व्यवस्था, कर्तव्य, नैतिकता, कानून, दंड और पारिवारिक जीवन जैसे विषयों का उल्लेख मिलता है।

यह ग्रंथ 12 अध्यायों में विभाजित है। अलग-अलग पांडुलिपियों और संस्करणों में श्लोकों की संख्या में अंतर पाया जाता है। समय के साथ मनुस्मृति का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है।

जाति, महिलाओं की स्थिति, सामाजिक कर्तव्यों और दंड व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों के कारण यह ग्रंथ लंबे समय से इतिहासकारों, विद्वानों और समाज सुधारकों के बीच चर्चा और विवाद का विषय रहा है।

अध्याय 9 में महिलाओं को लेकर क्या कहा गया है?

राहुल गांधी के बयान से संबंधित प्रमुख संदर्भ मनुस्मृति के अध्याय 9 में मिलता है। खास तौर पर श्लोक 9.2 और 9.3 में महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख है।

श्लोक 9.3 में कहा गया है कि महिला बचपन में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में पुत्रों की देखरेख में रहती है। इसी श्लोक में महिला की स्वतंत्रता को लेकर भी प्रावधान दिया गया है।

इस लिहाज से देखें तो पिता-पति-पुत्र के क्रम को लेकर राहुल गांधी का दावा मनुस्मृति के श्लोक 9.3 में मौजूद कथन से मेल खाता है।

अध्याय 9 में महिलाओं से जुड़े और क्या प्रावधान हैं?

अध्याय 9 में विवाह, पति-पत्नी के कर्तव्यों और पारिवारिक व्यवस्था से संबंधित कई अन्य नियम भी दिए गए हैं। इनमें महिलाओं की सुरक्षा और उनके सामाजिक व्यवहार से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

यही वजह है कि आधुनिक दौर में इन श्लोकों की कई विद्वानों और समाज सुधारकों ने आलोचना की है। आलोचकों का तर्क है कि इन प्रावधानों में महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को आधुनिक समानता और अधिकारों की अवधारणा के अनुरूप नहीं देखा गया है।

क्या मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान की बात भी है?

मनुस्मृति को केवल एक ही नजरिए से देखना भी पूरी तस्वीर नहीं बताता। ग्रंथ के कुछ हिस्सों में महिलाओं के सम्मान पर भी जोर दिया गया है।

अध्याय 3 के श्लोक 3.55 में परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा महिलाओं के सम्मान और उनकी उचित देखभाल की बात कही गई है।

वहीं श्लोक 3.56 में महिलाओं के सम्मान को परिवार की समृद्धि और धार्मिक गतिविधियों से जोड़ा गया है। इसके अगले श्लोक में भी महिलाओं के सुख और परिवार के कल्याण के बीच संबंध बताया गया है।

इसलिए मनुस्मृति में महिलाओं से संबंधित विचारों को समझने के लिए अलग-अलग श्लोकों और उनके संदर्भ को साथ देखना जरूरी है।

राहुल गांधी का दावा कितना सही है?

अगर राहुल गांधी के दावे को विशेष रूप से उस कथन तक सीमित रखा जाए जिसमें महिला के बचपन में पिता, युवावस्था में पति और वृद्धावस्था में पुत्रों के संरक्षण में रहने की बात कही गई है, तो इसका संदर्भ मनुस्मृति के श्लोक 9.3 में मिलता है।

हालांकि, पूरे ग्रंथ की विचारधारा को केवल इसी एक श्लोक के आधार पर समझना उचित नहीं होगा। मनुस्मृति में महिलाओं के विवाह, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सम्मान, संपत्ति और सामाजिक आचरण से जुड़े अलग-अलग प्रावधान भी मौजूद हैं।

निष्कर्ष यह है कि राहुल गांधी ने जिस विशेष कथन का जिक्र किया, उसका आधार मनुस्मृति में मौजूद है। लेकिन मनुस्मृति की व्यापक व्याख्या के लिए उसके अन्य श्लोकों और ऐतिहासिक संदर्भ को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here