
रक्षाबंधन के त्योहार के बीच पंजाब के अमृतसर जिले का बाबा बकाला साहिब एक बार फिर धर्म और राजनीति के बड़े संगम का गवाह बन रहा है। यहां आयोजित होने वाला रक्खड़ पुन्निया मेला सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि पंजाब की सियासत में भी इसका खास महत्व माना जाता है।
तीन दिवसीय मेले के पहले दिन शुक्रवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान से लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के कई वरिष्ठ नेता तक बाबा बकाला साहिब पहुंचे। अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मंचों से शक्ति प्रदर्शन और जनता से संवाद की तैयारी की है।
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस बार रक्खड़ पुन्निया मेले में नेताओं की सक्रियता को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक दलों के लिए यह माझा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने और चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का अहम मौका बन गया है।
क्या है रक्खड़ पुन्निया मेला?
रक्खड़ पुन्निया यानी सावन महीने की पूर्णिमा के अवसर पर हर साल बाबा बकाला साहिब में इस मेले का आयोजन किया जाता है। रक्षाबंधन के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और गुरुद्वारा साहिब में माथा टेककर आशीर्वाद लेते हैं।
समय के साथ यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। मेले के दौरान पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग बाबा बकाला साहिब पहुंचते हैं।
यही वजह है कि राजनीतिक दल भी इस मौके को जनता तक अपनी बात पहुंचाने के बड़े मंच के तौर पर देखते हैं।

गुरु तेग बहादर जी से जुड़ा है बाबा बकाला साहिब का इतिहास
बाबा बकाला साहिब का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व सिख इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि श्री गुरु तेग बहादर जी ने यहां एक भोरे में रहकर लंबे समय तक तपस्या की थी।
धार्मिक इतिहास के अनुसार, उनकी तपस्या करीब 26 वर्ष, 9 महीने और 13 दिन तक चली थी। इसी वजह से बाबा बकाला साहिब सिख श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है।

पंजाब की राजनीति में इतना खास क्यों है यह मेला?
रक्खड़ पुन्निया मेले के दौरान बाबा बकाला साहिब और आसपास के इलाकों में राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं।
मेले में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी नेताओं को सीधे जनता तक पहुंचने का मौका देती है। खासतौर पर पंजाब के माझा क्षेत्र में राजनीतिक संदेश पहुंचाने के लिहाज से यह आयोजन महत्वपूर्ण माना जाता है।
राजनीतिक दल इस मंच के जरिए किसानों, ग्रामीण मतदाताओं और स्थानीय लोगों के साथ संवाद करने की कोशिश करते हैं।
शक्ति प्रदर्शन का भी बनता है मंच
रक्खड़ पुन्निया मेला अब पंजाब की राजनीति में एक तरह से सियासी शक्ति प्रदर्शन का मंच भी बन चुका है।
कौन-सी पार्टी कितनी बड़ी सभा कर रही है, मंच पर कितने बड़े नेता मौजूद हैं और किस नेता की सभा में कितनी भीड़ जुटी—इन सब पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होती है।
मेले के मंच से दिए गए नेताओं के भाषणों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य और केंद्र की राजनीति से जुड़े बड़े मुद्दे भी उठाए जाते हैं।
इस बार अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन राजनीतिक कार्यक्रमों का महत्व और बढ़ गया है।
आम आदमी पार्टी ने रइया में सजाया मंच
आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से बाबा बकाला साहिब से कुछ दूरी पर रइया की अनाज मंडी में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ पंजाब सरकार के कई मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं।
AAP के लिए यह कार्यक्रम माझा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने का मौका माना जा रहा है।
BJP के मंच पर भी दिग्गज नेता
भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी रक्खड़ पुन्निया मेले को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पंजाब बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं समेत पार्टी के कई नेता मेले में पहुंचे हैं।
बीजेपी के लिए पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में धार्मिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण आयोजनों में पार्टी नेताओं की मौजूदगी को संगठन विस्तार और जनसंपर्क की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस भी मैदान में
कांग्रेस ने भी मेले के मौके पर अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाई है। पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं।
कांग्रेस के लिए यह मौका राज्य सरकार को घेरने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने राजनीतिक अभियान को धार देने का है।
अकाली दल ने भी तैयार किया अपना मंच
शिरोमणि अकाली दल (बादल) की ओर से गुरु तेग बहादुर हॉकी स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
पार्टी के कार्यक्रम की अगुवाई कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा समेत अकाली दल के कई वरिष्ठ नेता इसमें शामिल हो रहे हैं।
अकाली दल के लिए माझा क्षेत्र का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है। ऐसे में रक्खड़ पुन्निया मेले के जरिए पार्टी अपने पारंपरिक राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है।
अगले साल चुनाव, इसलिए इस बार बढ़ी सियासी गर्मी
पंजाब विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में रक्खड़ पुन्निया मेले में इस बार जिस तरह से अलग-अलग राजनीतिक दलों के बड़े नेता जुटे हैं, उसने मेले का राजनीतिक महत्व और बढ़ा दिया है।
AAP सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी, कांग्रेस सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी, बीजेपी पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेगी और अकाली दल अपने पुराने राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।
यही वजह है कि बाबा बकाला साहिब में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पंजाब की चुनावी राजनीति की तस्वीर भी दिखाई दे रही है।
रक्खड़ पुन्निया से निकलेंगे कौन से सियासी संकेत?
रक्खड़ पुन्निया मेले में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों पर इस बार पूरे पंजाब की नजर है। नेताओं के भाषण, भीड़ का आकार और जनता के बीच राजनीतिक संदेश आने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति के संकेत दे सकते हैं।
ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मेले में कौन पहुंचा, बल्कि यह भी है कि किस नेता की सभा में कितना जनसमर्थन दिखा और कौन-सी पार्टी माझा क्षेत्र में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में सफल रही।
आने वाले चुनावी महीनों में इन तस्वीरों और बयानों का असर पंजाब की राजनीति में देखने को मिल सकता है।





















