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Punjab Mining Revenue: पंजाब की खनन आय में 7 गुना उछाल, 799 करोड़ रुपये तक पहुंची कमाई; केंद्र से मांगा समान अवसर

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Punjab Mining Minister Barinder Kumar Goyal discussing mining revenue growth and SASCI financial assistance for Punjab
खनन आय में सात गुना वृद्धि के बाद केंद्र से वित्तीय सहायता में समान अवसर मांग रही पंजाब सरकार।

पंजाब सरकार ने खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों के दम पर अपनी वार्षिक आय में बड़ी बढ़ोतरी का दावा किया है। राज्य की खनन आय वित्त वर्ष 2017-18 में 123.5 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 799 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि के बाद अब पंजाब सरकार ने केंद्र से एस.ए.एस.सी.आई. 2026-27 योजना के तहत समान वित्तीय अवसर देने की मांग उठाई है।

पंजाब के खनन एवं भूविज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने गोवा में 5 और 6 नवंबर को आयोजित राष्ट्रीय खनन सम्मेलन में राज्य का पक्ष रखा। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने की। इस दौरान गोयल ने कहा कि पंजाब मुख्य रूप से रेत, बजरी और मिट्टी जैसे लघु खनिजों पर निर्भर है। इसलिए बड़े खनिजों की खदानों की नीलामी को वित्तीय सहायता का मुख्य आधार बनाना राज्य के साथ उचित नहीं होगा।

खनन सुधारों में पंजाब ने हासिल किया पहला स्थान

मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में पंजाब ने स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स के तहत श्रेणी-3 के राज्यों में पहला स्थान हासिल किया था। खनन क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए राज्य को 200 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रोत्साहन राशि भी मिली।

उन्होंने कहा कि एस.ए.एस.सी.आई. 2026-27 के संशोधित पात्रता नियमों में बड़े खनिजों की खदानों की नीलामी और उन्हें चालू करने पर अधिक जोर दिया गया है। पंजाब में फिलहाल बड़े खनिजों की कोई खदान चालू नहीं है। ऐसे में राज्य को उसकी भौगोलिक और खनिज परिस्थितियों के अनुसार पात्रता का अवसर मिलना चाहिए।

केंद्र से एस.ए.एस.सी.आई. योजना में समान अवसर की मांग

पंजाब सरकार का कहना है कि खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों का मूल्यांकन केवल बड़े खनिजों की खदानों के आधार पर नहीं होना चाहिए। राज्य में लघु खनिजों से संबंधित सुधारों को भी वित्तीय सहायता के लिए समान महत्व दिया जाना चाहिए।

मंत्री ने केंद्र से आग्रह किया कि लघु खनिजों के लिए वैकल्पिक पात्रता मानदंड तैयार किए जाएं, ताकि पंजाब को उसके सुधारों के अनुरूप वित्तीय प्रोत्साहन मिल सके।

फाजिल्का और मुक्तसर में पोटाश की खोज तेज

पंजाब सरकार अब फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब में पोटाश के संभावित भंडारों की खोज पर भी जोर दे रही है। मंत्री ने राष्ट्रीय खनिज सुरक्षा में राज्य की संभावित भूमिका का उल्लेख करते हुए पोटाश अन्वेषण की जानकारी दी।

उन्होंने राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एन.एम.ई.टी.) से पत्तरेवाला, खिप्पांवाली, खुरंज और बदियां के प्रस्तावित पोटाश अन्वेषण ब्लॉकों को वित्त वर्ष 2027-28 के लिए जल्द मंजूरी देने की मांग की।

इसके अलावा राजपुरा, गिद्दड़ांवाली और शेरगढ़ में भूवैज्ञानिक अन्वेषण को जी-3 से जी-1 स्तर तक आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया।

शेरगढ़ ब्लॉक में निवेशकों को आकर्षित करने की तैयारी

मंत्री ने बताया कि शेरगढ़ ब्लॉक लगभग 46 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। पिछली नीलामी में इस ब्लॉक के लिए कोई बोलीदाता सामने नहीं आया था।

अब पंजाब सरकार चाहती है कि राजस्थान के नागौर-गंगानगर बेसिन में अन्वेषण कर रही कंपनियों को शेरगढ़ ब्लॉक में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए केंद्र से सहयोग मांगा गया है।

ड्रोन सर्वेक्षण से मिले खनन के 268 संभावित स्थान

पंजाब में खनन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। मार्च 2025 में हुए समझौते के तहत आईआईटी रोपड़ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है।

राज्य में डीजीपीएस, ड्रोन मैपिंग और बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण के जरिए नदियों में खनिजों की उपलब्धता और पुनःपूर्ति का अध्ययन किया जा रहा है। इन तकनीकों से खनन के लिए 268 संभावित स्थानों की पहचान की गई है। इसके अलावा 13 जिला सर्वेक्षण रिपोर्टें तैयार कर पर्यावरणीय मंजूरी भी प्राप्त की गई है।

447 क्रशरों को डिजिटल निगरानी नेटवर्क से जोड़ा

खनन गतिविधियों में पारदर्शिता लाने के लिए पंजाब माइनिंग मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल के माध्यम से निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। इसके तहत 447 प्रमाणित स्टोन क्रशरों को स्मार्ट बिजली मीटर, वाहन, फास्टैग, खजाना और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेटवर्क से जोड़ा गया है।

मंत्री के अनुसार, पर्यावरणीय मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में भी सुधार हुआ है। पहले जहां मंजूरी में एक साल से अधिक समय लगता था, वहीं अब यह अवधि छह महीने से कम रह गई है।

वित्त वर्ष 2025-26 में 15 पर्यावरणीय मंजूरियां दी गई थीं, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक 47 मंजूरियां जारी की जा चुकी हैं।

केंद्र ने पंजाब की मांगों पर विचार का दिया भरोसा

राष्ट्रीय खनन सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पंजाब द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और राज्य की विशेष चिंताओं पर सहयोग का आश्वासन दिया।

सम्मेलन के बाद बरिंदर कुमार गोयल ने केंद्रीय खान मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक की। इसमें पंजाब के खनन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। अगली बैठक चंडीगढ़ में आयोजित करने की बात भी कही गई।

पंजाब सरकार का लक्ष्य वैज्ञानिक अन्वेषण, डिजिटल निगरानी और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से खनन क्षेत्र को मजबूत करना और राज्य की आय में आगे भी बढ़ोतरी करना है।

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