अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता नहीं होने की स्थिति में नई सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया है। फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ‘एक और लिटिल Epic Fury’ कर सकता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के साथ संभावित बातचीत और युद्ध को खत्म करने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे पहले ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका युद्ध को जल्दी खत्म कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इसे तुरंत समाप्त किया जाए या धीरे-धीरे खत्म होने दिया जाए।
ईरान की तरफ से भी बड़ा पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति के ताजा बयान के बाद ईरानी अधिकारियों ने भी कड़ा संदेश दिया है। Reuters के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि अगर अमेरिका और इजराइल फिर से ईरान पर हमला करते हैं तो तेहरान खाड़ी में मौजूद समुद्र के नीचे की संचार केबलों को निशाना बनाने की योजना पर विचार कर रहा है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े अधिकारी यदोल्लाह जावानी ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को संभावित निशाने के तौर पर बताया है।
इंटरनेट केबल कटने से कितना असर होगा?
समुद्र के नीचे बिछी केबल वैश्विक इंटरनेट और डिजिटल संचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हॉर्मुज में केबल कटते ही पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हॉर्मुज से गुजरने वाली अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ वैश्विक क्षमता के 1 प्रतिशत से भी कम है। हालांकि कई केबल एक साथ क्षतिग्रस्त होने पर क्षेत्रीय इंटरनेट, बैंकिंग, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
युद्ध के दौरान केबल की मरम्मत भी मुश्किल हो सकती है। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम, बीमा लागत और अनुमति संबंधी दिक्कतें मरम्मत में देरी कर सकती हैं।
ट्रंप के बयानों से बढ़ी अनिश्चितता
एक तरफ ट्रंप ईरान के साथ समझौते की संभावना की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने नई सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा है।
ट्रंप ने यह भी कहा है कि अमेरिका के पास युद्ध को जल्दी खत्म करने की क्षमता है। इसी बीच संभावित नए हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई को लेकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।
दुनिया की नजर हॉर्मुज पर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने से सिर्फ इंटरनेट और संचार ही नहीं, बल्कि तेल आपूर्ति, शिपिंग और वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई देशों ने नए हमलों से बचने और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।



























