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The Vvaan Review in Hindi: फर्स्ट हाफ शानदार, सेकंड हाफ में बिखरी कहानी; सिद्धार्थ-तमन्ना ने किया प्रभावित

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The Vvaan Movie में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया
The Vvaan में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की जोड़ी और शानदार केमिस्ट्री।

रेटिंग: ⭐⭐⭐/5

अभिनेता: सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, सुनील ग्रोवर, श्वेता तिवारी, अनूप सोनी, मनीष पॉल
निर्देशक: दीपक कुमार मिश्रा
श्रेणी: हिंदी, फैंटेसी, थ्रिलर
अवधि: 2 घंटे 17 मिनट

बॉलीवुड में लोककथाओं, पौराणिक मान्यताओं और फोकलोर को आधुनिक कहानी के साथ जोड़ने का चलन पिछले कुछ समय में काफी देखने को मिला है। ‘पहेली’, ‘स्त्री’, ‘मुंज्या’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों ने लोकविश्वास और सुपरनैचुरल कहानियों को दर्शकों के सामने अलग अंदाज में पेश किया है।

निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा भी इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की वन देवी से जुड़ी एक लोककथा पर आधारित ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ लेकर आए हैं। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया, सुनील ग्रोवर, श्वेता तिवारी, अनूप सोनी और मनीष पॉल अहम भूमिकाओं में हैं।

फिल्म आस्था, प्रकृति, अंधविश्वास, लालच और विकास के बीच टकराव को एक रहस्यमयी कहानी के जरिए सामने रखती है। तो क्या यह दिलचस्प कॉन्सेप्ट पर्दे पर उतना ही प्रभाव छोड़ पाता है? आइए जानते हैं।

The Vvaan Movie: कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी मुंबई में रहने वाले पति-पत्नी ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और ममता (तमन्ना भाटिया) के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों लंबे समय से माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलती।

छठ पूजा के मौके पर दोनों अपने पुश्तैनी गांव पहुंचते हैं। यहां ऋषि के भैया-भाभी यानी अनूप सोनी और श्वेता तिवारी अपने बच्चों के साथ रहते हैं। उनके साथ ऋषि का ब्लॉगर दोस्त वेद भी मौजूद है, जिसका किरदार मनीष पॉल ने निभाया है।

गांव पहुंचने के बाद ऋषि को पता चलता है कि यहां सदियों पुरानी मान्यताओं और परंपराओं का आज भी काफी प्रभाव है। गांव के जंगल को पवित्र माना जाता है और सूर्यास्त के बाद वहां जाने पर पूरी तरह रोक है।

ऋषि इन मान्यताओं को अंधविश्वास मानता है।

जंगल में छिपा है कौन सा रहस्य?

कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब ऋषि का परिचित दीपक, जिसका किरदार सुनील ग्रोवर निभाते हैं, बेहतर कनेक्टिविटी के लिए जंगल के एक हिस्से को काटकर रास्ता बनाने की कोशिश करता है।

गांव वाले इसका विरोध करते हैं। उनका मानना है कि पवित्र जंगल के साथ छेड़छाड़ करने से अनर्थ हो सकता है।

दूसरी तरफ ऋषि भी जंगल से लगी अपनी जमीन बेचने की कोशिश में है। इस तरह फिल्म में एक तरफ विकास और आधुनिक सोच है, तो दूसरी तरफ आस्था और सदियों पुरानी मान्यताएं।

जब ऋषि सूर्यास्त के बाद जंगल में प्रवेश करता है, तो उसके सामने ऐसे रहस्य आने लगते हैं, जिनकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।

यहीं से फिल्म का असली रहस्य शुरू होता है।

The Vvaan Review: कैसी है फिल्म?

फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है। ‘पंचायत’ और ‘गुल्लक’ जैसी चर्चित सीरीज से जुड़े निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा से एक मजबूत कहानी की उम्मीद रहती है। यहां भी फिल्म का आइडिया काफी आकर्षक है।

फिल्म का पहला हिस्सा परिवार, प्रकृति, आस्था और रहस्यमयी मान्यताओं की पृष्ठभूमि तैयार करता है। शुरुआत में कहानी को स्थापित होने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन इसके बावजूद फिल्म दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखती है।

खासकर यह सवाल लगातार मन में बना रहता है कि आखिर सूर्यास्त के बाद जंगल में जाने पर रोक क्यों है?

फर्स्ट हाफ में यह रहस्य फिल्म को आगे खींचता है।

सेकंड हाफ में कमजोर पड़ती है कहानी

जहां फिल्म का पहला हिस्सा सहज तरीके से आगे बढ़ता है, वहीं सेकंड हाफ में स्क्रीनप्ले कुछ बिखरा हुआ नजर आता है।

कहानी में कई दिलचस्प मोड़ आते हैं, लेकिन सभी घटनाएं एक-दूसरे से उतनी मजबूती से जुड़ी हुई महसूस नहीं होतीं। कुछ हिस्से मनोरंजन करते हैं, लेकिन फिल्म की गति और पकड़ में असमानता दिखाई देती है।

क्लाइमैक्स में देवी की स्थापना से जुड़ी बैकस्टोरी भी उतनी प्रभावी नहीं लगती। यह हिस्सा कहानी में कुछ हद तक अलग से जोड़ा हुआ महसूस होता है।

यही वजह है कि फिल्म जिस मजबूत क्लाइमैक्स की उम्मीद पैदा करती है, वहां पहुंचकर उसका प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है।

आस्था, अंधविश्वास और लालच का कनेक्शन

फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कहानी सिर्फ अंधविश्वास और आस्था के बीच संघर्ष तक सीमित नहीं रहती।

निर्देशक ने इसमें मानवीय लालच और विकास बनाम प्रकृति का एंगल भी जोड़ा है।

एक तरफ गांव के लोग जंगल को आस्था और परंपरा से जोड़कर देखते हैं, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक सोच रखने वाले किरदार जंगल और जमीन को विकास के नजरिए से देखते हैं।

यही टकराव फिल्म को एक अलग सामाजिक परत देता है।

The Vvaan में सिद्धार्थ मल्होत्रा की एक्टिंग

सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ऋषि के किरदार को अच्छी तरह निभाया है।

उनका किरदार शुरुआत में पढ़ा-लिखा और व्यावहारिक नजर आता है, जो गांव की मान्यताओं पर सवाल करता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसका सामना ऐसे अनुभवों से होता है जो उसकी सोच बदलने लगते हैं।

सिद्धार्थ ने इस बदलाव को सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है।

उनका स्क्रीन प्रेजेंस भी फिल्म की बड़ी ताकत है।

तमन्ना भाटिया ने भी छोड़ी छाप

तमन्ना भाटिया ममता के किरदार में फिल्म के इमोशनल पक्ष को मजबूत करती हैं।

सिद्धार्थ और तमन्ना की जोड़ी फ्रेश नजर आती है और दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री फिल्म के रोमांटिक और भावनात्मक हिस्सों को बेहतर बनाती है।

तमन्ना का सहज अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को एक अलग खूबसूरती देता है।

सुनील ग्रोवर और बाकी कलाकारों की एक्टिंग

सुनील ग्रोवर ने नकारात्मक भूमिका में अच्छा काम किया है। उनका किरदार कहानी में तनाव और संघर्ष को बढ़ाता है।

अनूप सोनी और श्वेता तिवारी ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है।

वहीं मनीष पॉल अपने कॉमिक ट्रैक के जरिए फिल्म में हल्के-फुल्के पल लेकर आते हैं। उनकी मौजूदगी कहानी के गंभीर माहौल के बीच मनोरंजन का स्पेस देती है।

सहायक कलाकारों का काम भी प्रभावी है।

The Vvaan का VFX और सिनेमैटोग्राफी

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी जंगल के रहस्य और वातावरण को स्थापित करने में मदद करती है। मनु आनंद ने जंगल के विजुअल्स और रहस्यमयी माहौल को अच्छे तरीके से कैप्चर किया है।

रहस्यमयी बाघ, बैल, देवी और नकारात्मक शक्तियों से जुड़े VFX सीक्वेंस कुछ जगह प्रभाव पैदा करते हैं।

हालांकि सेट डिजाइनिंग और विजुअल वर्ल्ड पर थोड़ा और काम किया जा सकता था।

The Vvaan Movie के गाने

फिल्म में अलग-अलग कंपोजर्स का संगीत है। ‘समझो ना’, ‘ठुमक ठुमक’ और ‘छठी मैया’ जैसे गाने कहानी के माहौल के साथ जुड़ते हैं और सुनने में अच्छे लगते हैं।

हालांकि फिल्म का मुख्य आकर्षण इसका संगीत नहीं, बल्कि इसकी लोककथा और रहस्य है।

The Vvaan Review: Verdict

कुल मिलाकर The Vvaan का आइडिया काफी दिलचस्प है। लोककथा, प्रकृति, आस्था, अंधविश्वास और मानवीय लालच को एक साथ जोड़ने की कोशिश फिल्म को अलग बनाती है।

फिल्म का पहला हिस्सा कहानी और रहस्य को अच्छी तरह स्थापित करता है, जबकि सेकंड हाफ में स्क्रीनप्ले अपनी पकड़ कुछ हद तक खो देता है। कमजोर और कुछ हद तक असहज क्लाइमैक्स भी फिल्म के प्रभाव को कम करता है।

इसके बावजूद सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की केमिस्ट्री, सुनील ग्रोवर की नकारात्मक भूमिका, सिनेमैटोग्राफी और दिलचस्प लोककथा फिल्म की खासियत हैं।

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