पंजाब की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत अपने अलग-अलग रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती है। राज्य के लुधियाना जिले में एक ऐसी दरगाह है, जहां की परंपरा आम धार्मिक स्थलों से काफी अलग है। जगराओं के कौंके कलां क्षेत्र में स्थित बाबा रोडे शाह की दरगाह में श्रद्धालु मिठाई या फल के बजाय शराब चढ़ाते हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां चढ़ाई गई मदिरा को बाद में दरगाह में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। यही अनोखी परंपरा इस दरगाह को आसपास के इलाकों में खास पहचान देती है।
यहां शराब चढ़ाने की क्या है मान्यता?
स्थानीय श्रद्धालुओं और निवासियों के अनुसार, बाबा रोडे शाह की दरगाह पर शराब चढ़ाने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ बाबा के दरबार में शराब अर्पित करने और प्रार्थना करने से मनोकामना पूरी होती है।
इसी विश्वास के चलते अलग-अलग समुदायों के लोग यहां पहुंचकर माथा टेकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा अर्पित करते हैं।
प्रसाद में बांटी जाती है मदिरा
दरगाह पर चढ़ावे के तौर पर आने वाली शराब को सेवादार बड़े बर्तनों में एकत्र करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाद में इसे वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
बताया जाता है कि शराब नहीं पीने वाले कुछ श्रद्धालु भी यहां प्रसाद के रूप में इसकी एक बूंद ग्रहण करने की परंपरा निभाते हैं।
बाबा रोडे शाह से जुड़ी है एक पुरानी कहानी
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, बाबा रोडे शाह कुछ समय के लिए इस क्षेत्र में रुके थे। इसी दौरान एक निसंतान दंपति उनके पास पहुंचा और संतान प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगा।
मान्यता के अनुसार, बाबा के आशीर्वाद से दंपति को संतान की प्राप्ति हुई। इसके बाद वे बाबा के लिए शराब की बोतल लेकर पहुंचे। बताया जाता है कि बाबा स्वयं शराब का सेवन नहीं करते थे, इसलिए उन्होंने बोतल स्वीकार करने के बजाय उसे खोलकर आसपास मौजूद लोगों में बांट दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी घटना को बाद में शराब चढ़ाने और उसे प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा से जोड़ा जाने लगा।
करीब 100 साल से लग रहा है मेला
स्थानीय लोगों का दावा है कि बाबा रोडे शाह की दरगाह पर लगने वाला वार्षिक मेला करीब 100 वर्षों से आयोजित होता आ रहा है। सितंबर में लगने वाला यह मेला कई दिनों तक चलता है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इस साल भी दरगाह पर 5 से 7 सितंबर तक मेला आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मेले में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग दिन
स्थानीय परंपरा के अनुसार, मेले के पहले दिन महिलाओं और बच्चों को दरगाह पर माथा टेकने की अनुमति होती है, जबकि अगले दो दिनों में पुरुष श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
मेले के दौरान दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और आसपास के इलाकों में काफी चहल-पहल रहती है।
दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
बाबा रोडे शाह की दरगाह पर स्थानीय लोगों के अलावा पंजाब के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही जाती है। वार्षिक मेले के दौरान विदेशों में रहने वाले कुछ श्रद्धालुओं के भी यहां पहुंचने का दावा स्थानीय लोग करते हैं।
दरगाह की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ पंजाब की विविध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं का भी हिस्सा मानी जाती है।
अनोखी परंपरा बनी चर्चा का विषय
जहां ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर मिठाई, फल या अन्य खाद्य सामग्री प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाती है, वहीं बाबा रोडे शाह की दरगाह पर शराब चढ़ाने और उसे प्रसाद के रूप में वितरित करने की स्थानीय परंपरा इसे अलग पहचान देती है।
हालांकि, दरगाह से जुड़ी इन मान्यताओं और परंपराओं के बारे में उपलब्ध जानकारी मुख्यतः स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के कथनों पर आधारित है। इसके ऐतिहासिक प्रमाणों को लेकर अलग से शोध की आवश्यकता हो सकती है।






















