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SIR विवाद पर चुनाव आयोग की 8 पॉइंट में सफाई, बोला- ‘अलग-अलग राय होना सामान्य’, सभी फैसले सर्वसम्मत

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SIR विवाद पर सफाई देते चुनाव आयोग की तस्वीर
SIR को लेकर आंतरिक आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपने फैसलों और प्रक्रिया पर सफाई दी।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने बुधवार को अपनी स्थिति स्पष्ट की। चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में फैसले से पहले चर्चा के दौरान अलग-अलग राय, सवाल, टिप्पणियां और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

यह प्रतिक्रिया The Indian Express की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की ओर से SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता डेटाबेस से जुड़े कुछ कदमों पर आपत्तियों का उल्लेख किया गया था।

चुनाव आयोग ने अपने प्रेस नोट में पूरे विवाद पर 8 प्रमुख बिंदुओं के जरिए अपना पक्ष रखा।

1. अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया

ECI ने कहा कि किसी भी संस्था में निर्णय लेने से पहले होने वाली चर्चा में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आना सामान्य है। आयोग के अनुसार, ये टिप्पणियां अंतिम फैसला होने से पहले की निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।

आयोग ने यह भी कहा कि किसी प्रस्ताव पर सवाल उठाना या सुझाव देना अपने आप में अंतिम निर्णय से असहमति नहीं माना जा सकता।

2. हर अधिकारी दे सकता है सुझाव

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव दे सकता है।

ECI के मुताबिक, ड्राफ्ट तैयार होने के दौरान सदस्यों की ओर से उठाए गए सवाल और सुझाव चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने तथा मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

3. कुछ आंतरिक टिप्पणियों से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती

आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि में हुई कुछ चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों या नोट्स को सामने रखकर, जबकि इस दौरान लिए गए बड़ी संख्या में फैसलों, मंजूरियों और निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।

ECI ने इसे निर्णय प्रक्रिया के केवल एक हिस्से को दिखाने वाला बताया।

4. करीब 40 नई पहल और कई चुनाव सुधारों का हवाला

चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उसने कई फैसले लिए, निर्देश जारी किए और करीब 40 नई पहल शुरू की हैं।

इनमें देशभर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रियाएं, जिसमें SIR भी शामिल है, का उल्लेख किया गया है। आयोग ने इन्हें व्यापक चुनावी सुधारों का हिस्सा बताया।

5. पिछले एक साल के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मत: ECI

आयोग ने अपने जवाब में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी अंतिम फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

यानी आयोग के अनुसार, आंतरिक चर्चा में किसी सदस्य की अलग राय या सुझाव सामने आना और अंतिम निर्णय का सर्वसम्मत होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

6. बिहार समेत कई राज्यों में चुनाव कराने का दिया उदाहरण

ECI ने अपने कामकाज का उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव और उनसे जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

आयोग के अनुसार, इन चुनावों के संचालन में व्यापक प्रशासनिक मशीनरी, कई स्तरों पर निर्देश और आयोग की मंजूरियां शामिल थीं।

7. ECINet और डेटा सुरक्षा पर भी सफाई

चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के मुताबिक, डिजिटल सिस्टम को अनधिकृत छेड़छाड़ और बदलाव से बचाने के लिए सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं।

ECI ने कहा कि IT सुरक्षा जांच और ऑडिट कंट्रोल राष्ट्रीय डेटाबेस में अपनाए जाने वाले सामान्य साइबर सुरक्षा उपाय हैं। वहीं Electoral Registration Officers (EROs) और District Election Officers (DEOs) कानून के तहत अपनी निर्धारित शक्तियों के अनुसार काम करते हैं।

8. संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की बात

चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और अपने सभी कार्य कानून, नियमों तथा आयोग के निर्देशों के अनुसार करता है।

आयोग ने कहा कि वह लोकतंत्र में अपनी भूमिका को समझते हुए संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

आखिर SIR विवाद शुरू कैसे हुआ?

यह विवाद The Indian Express की रिपोर्ट के बाद चर्चा में आया, जिसमें दो चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता सूची और SIR से जुड़े कुछ कदमों पर सवाल या आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख था। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, Form 6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे उठाए गए थे।

रिपोर्ट में जिन आपत्तियों का उल्लेख किया गया, उनमें कुछ कदमों को लेकर प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवाल भी शामिल थे। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि ये आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा थे और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

इस तरह फिलहाल दो बातें सामने हैं—रिपोर्ट में आंतरिक आपत्तियों का उल्लेख और चुनाव आयोग का यह पक्ष कि अलग-अलग राय सामान्य है तथा अंतिम फैसले सर्वसम्मत रहे हैं।

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