मद्रास हाई कोर्ट ने पत्रकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास से जुड़े एक मामले में अहम कदम उठाया है। अदालत ने उनकी पहचान और पृष्ठभूमि की जांच कराने तथा उनके सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार समेत कई संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस का जवाब छह सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है।
केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस
इस मामले में अदालत ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (चेन्नई), UIDAI के अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश सचिव, विधि एवं न्याय मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और Instagram के शिकायत अधिकारियों को भी नोटिस भेजा गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए प्रतिवादियों से जवाब मांगा है।
याचिका में पासपोर्ट और आधार रद्द करने की मांग
कांचीपुरम जिले के निवासी गणेश कुमार ने यह याचिका दायर की है। इसमें सौरव दास की पहचान और पृष्ठभूमि की विस्तृत, निष्पक्ष तथा गहन जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड को रद्द करने तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश देने की भी अपील की है। हालांकि, ये सभी याचिका में की गई मांगें हैं और इन पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने की भी अपील
याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौरव दास के Instagram और X (पूर्व में Twitter) अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि सौरव दास ने न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। इसी आधार पर उन्हें ऐसी टिप्पणियां करने से रोकने की मांग भी की गई है।
वकील ने अदालत में क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता बी. जगन्नाथ ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों के सामने पहले भी शिकायत रखी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वकील ने अदालत में दलील दी कि न्यायपालिका के बारे में सौरव दास की कथित टिप्पणियां उचित नहीं हैं और इसी वजह से याचिका दायर करनी पड़ी।
छह सप्ताह में देना होगा जवाब
मद्रास हाई कोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई प्रतिवादियों के जवाब और अदालत के निर्देशों के आधार पर होगी। फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।




























