भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की स्थिति सामने आई है। यह जानकारी ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने दी है।
ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित एक सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने बताया कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर ऐसी परिस्थितियां बनीं, जहां ITBP के जवानों का चीनी PLA सैनिकों के साथ सामना हुआ।
उन्होंने विशेष रूप से ITBP की नई ‘शौर्य कमांडो’ टीमों के प्रदर्शन की सराहना की। ITBP प्रमुख के मुताबिक, इन टीमों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार क्षमता का प्रदर्शन किया है।
हर बटालियन में कमांडो टीम तैयार करने की योजना
ITBP अब अपनी ऑपरेशनल क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी में है। ITBP प्रमुख ने बताया कि हर बटालियन में एक कमांडो टीम पहले ही तैयार की जा चुकी है।
इसके अलावा दो और कमांडो टीमों के गठन की प्रक्रिया चल रही है। भविष्य में हर बटालियन में एक पूरी कमांडो कंपनी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
ITBP एक ऐसी अलग बटालियन बनाने की दिशा में भी काम कर रही है, जो पूरी तरह कमांडो ऑपरेशंस पर केंद्रित होगी।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर बड़ा फोकस
सीमा पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच ITBP ड्रोन तकनीक पर भी विशेष ध्यान दे रही है। शत्रुजीत सिंह कपूर ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन ने पारंपरिक युद्ध के तौर-तरीकों को काफी बदल दिया है।
ITBP की योजना हर प्लाटून में ड्रोन यूनिट विकसित करने की है। इसके साथ ही ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने और स्वदेशी स्तर पर ड्रोन उत्पादन बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।
बल की आधुनिकीकरण योजना में एंटी-ड्रोन सिस्टम को भी अहम स्थान दिया गया है।
2030 तक आधुनिक उपकरणों से लैस होगी ITBP
ITBP प्रमुख के अनुसार आने वाले वर्षों में बल के आधुनिकीकरण पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये अलग रखने की योजना का भी जिक्र किया गया।
इसके अलावा कठिन पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज आवाजाही के लिए ऑल-टेरेन वाहन, ऑटोनॉमस ग्राउंड व्हीकल और क्विक रिएक्शन व्हीकल जैसे आधुनिक साधनों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का भी दिया उदाहरण
ITBP DG ने बदलते युद्ध के स्वरूप को समझाने के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन जैसी तकनीक छोटे और बड़े सैन्य बलों के बीच अंतर को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने चीन की PLA और उसकी सैन्य क्षमताओं में हुए निवेश का भी उल्लेख किया और कहा कि बदलते युद्धक्षेत्र में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
LAC पर क्यों बनती है आमने-सामने की स्थिति?
भारत और चीन के बीच LAC की धारणा कई इलाकों में अलग-अलग है। इसी वजह से पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देशों के सैनिक कई बार आमने-सामने आ जाते हैं।
हाल के घटनाक्रमों के बीच सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा बलों की तैयारी और निगरानी को और मजबूत किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।




























