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SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार ने दोनों चुनाव आयुक्तों संग की बैठक, 7 बड़े फैसलों से दूर हुआ मतभेद का सस्पेंस

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CEC ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की SIR बैठक
SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ पूर्ण आयोग की बैठक की।

चुनाव आयोग में कथित मतभेद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ पूर्ण आयोग की बैठक की। बैठक में Special Intensive Revision यानी SIR, नए मतदाताओं के Form 6, ECINET और मतदाताओं को होने वाली परेशानियों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पिछले कुछ दिनों से चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज थी। इससे पहले रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ फैसलों पर आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। चुनाव आयोग ने हालांकि स्पष्ट किया कि अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की मंजूरी से लिए गए।

SIR को लेकर आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने कहा कि SIR से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के अनुसार, बिहार में 24 जून 2025 को शुरू किए गए SIR के बाद अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके विस्तार से जुड़े फैसले भी पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अलग-अलग स्तर पर दिए गए सुझावों और आपत्तियों को अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इससे पहले आयोग ने कहा था कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में विचारों और सुझावों का आदान-प्रदान सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

वोटरों को नोटिस मिला तो अब क्या होगा?

SIR के दौरान तार्किक विसंगतियों या रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए आयोग ने प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की है।

अब ऐसे मामलों में मतदाताओं को सामान्य तौर पर ERO या AERO के सामने व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने के बजाय Booth Level Officer (BLO) उनके घर जाकर आवश्यक दस्तावेज जुटाएगा और उन्हें ECINET पर अपलोड करेगा।

केवल विशेष परिस्थितियों में ही ऑनलाइन सुनवाई की जरूरत होगी। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता की जगह उसका करीबी रिश्तेदार भी हिस्सा ले सकेगा।

Form 6 को लेकर भी आयोग ने दी सफाई

नए मतदाताओं के लिए Form 6 को लेकर भी पिछले दिनों सवाल उठे थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के दौरान इस्तेमाल की गई अतिरिक्त घोषणा व्यवस्था को लेकर भ्रम नहीं होना चाहिए।

आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए मतदाताओं के लिए लागू सामान्य Form 6 प्रक्रिया में इस अस्थायी व्यवस्था को जारी नहीं रखा जाएगा। Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला आवेदन फॉर्म है।

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला

बैठक में गोवा के उन 97 मतदाताओं का मुद्दा भी सामने आया, जिनके Form 6 से संबंधित प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे।

आयोग के मुताबिक, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 81 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जा चुके हैं और बाकी मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

गोवा के CEO की वेबसाइट पर भी SIR 2026 से संबंधित मतदाता सूची और Form 6 की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है।

बेघर और मजदूरों के लिए विशेष हेल्प डेस्क

चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था करने को कहा है जिन्हें SIR प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज जमा करने में परेशानी हो सकती है।

जिला निर्वाचन अधिकारियों को रात्रि आश्रय स्थलों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त हेल्प डेस्क तथा विशेष कैंप लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।

इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराना है।

ECINET की भी होगी समीक्षा

चुनाव आयोग ने ECINET के कामकाज और नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है।

यह समिति वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में काम करेगी और इसमें IIT या IIIT से जुड़े स्वतंत्र विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। आयोग के मुताबिक, इसका उद्देश्य तकनीकी व्यवस्था और उसके नियम-कायदे के अनुरूप कामकाज की निगरानी करना है।

दिल्ली और महाराष्ट्र के लिए बढ़ी समयसीमा

आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से संबंधित दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा में भी बदलाव किया है।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है। महाराष्ट्र के लिए भी संबंधित प्रक्रिया के लिए अलग समयसीमा तय की गई है।

अब आयोग की बैठकों में भी होगा बदलाव

पूर्ण आयोग की बैठक में आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

अब आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से भेजने और बैठकों के मिनट्स तैयार करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इससे आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया का रिकॉर्ड और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र पर भी सफाई

दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र को लेकर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की।

आयोग के अनुसार, यह पत्र SIR, IT Division या किसी व्यापक नीतिगत मुद्दे से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी से जुड़ा प्रशासनिक मामला था।

आयोग ने कहा कि इस मामले में संबंधित अधिकारी से जुड़ा फैसला लागू नहीं किया गया। साथ ही, जिला निर्वाचन अधिकारियों के ECINET/IT व्यवस्था से जुड़े अधिकार वापस लिए जाने की बात को भी आयोग ने खारिज किया।

क्या खत्म हुआ चुनाव आयोग में मतभेद का विवाद?

शनिवार की पूर्ण आयोग बैठक के बाद चुनाव आयोग ने साफ तौर पर कहा कि SIR और आयोग के अन्य अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

हालांकि, इससे पहले प्रकाशित रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों की ओर से कई फैसलों पर आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। इसलिए मौजूदा स्थिति को समझने के लिए एक तरफ आयोग की आधिकारिक सफाई और दूसरी तरफ पहले प्रकाशित रिपोर्टों—दोनों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।

फिलहाल आयोग की बैठक के बाद सबसे बड़ा फोकस SIR प्रक्रिया को आसान बनाने, मतदाताओं की शिकायतों के निपटारे और चुनावी तकनीकी व्यवस्था में पारदर्शिता पर है।

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