
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी ने शुक्रवार, 25 सितंबर को चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रोष मार्च निकाला। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई वरिष्ठ नेता और विधायक शामिल हुए। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की गैरमौजूदगी ने एक बार फिर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की चर्चा को हवा दे दी। वहीं, पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट भी प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके।
चंडीगढ़ में कांग्रेस का प्रदर्शन, कई नेता हुए शामिल
पंजाब कांग्रेस ने शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पंजाब चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया।
प्रदर्शन में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के अलावा सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह, राणा केपी सिंह, त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और विजय इंदर सिंगला समेत कई नेता मौजूद रहे।
चन्नी और सचिन पायलट नहीं पहुंचे
इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी शामिल नहीं हुए। द ट्रिब्यून के मुताबिक, चन्नी ने अपनी पहले से तय प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए मार्च में शामिल नहीं होने की बात कही। वहीं, पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट भी प्रदर्शन में नहीं पहुंच सके क्योंकि वह राजस्थान में थे।
चन्नी और राजा वड़िंग के बीच पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चा होती रही है। सितंबर की शुरुआत में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब के लिए सचिन पायलट को नया प्रभारी नियुक्त किया था। इससे पहले पार्टी में अंदरूनी मतभेदों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं।
वड़िंग ने वरिष्ठ नेताओं को दिया सम्मान का संदेश
रोष मार्च के दौरान राजा वड़िंग ने वरिष्ठ नेताओं के सम्मान पर जोर दिया। उनका संदेश पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लेकर चलने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
हालांकि, किसी एक कार्यक्रम में नेताओं की मौजूदगी को पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद पूरी तरह खत्म होने का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। सितंबर में सचिन पायलट की नियुक्ति के बाद चन्नी और वड़िंग समेत अलग-अलग नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाने की कोशिशें जरूर हुई हैं।
रंधावा और परगट सिंह ने भी दिखाई एकजुटता
प्रदर्शन में सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि वह वायरल बुखार से परेशान होने के बावजूद कार्यक्रम में पहुंचे। वहीं, परगट सिंह समेत अन्य नेताओं ने भी पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया।
रंधावा इससे पहले भी सचिन पायलट की पंजाब में नियुक्ति का स्वागत कर चुके हैं। कांग्रेस हाईकमान की ओर से पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद पार्टी के अलग-अलग नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं।
क्या पंजाब कांग्रेस में सच में खत्म हो गई गुटबाजी?
पंजाब कांग्रेस में एकता की तस्वीर हाल के कार्यक्रमों में जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर पुराने मतभेदों की चर्चा अभी भी बनी हुई है।
सचिन पायलट की नियुक्ति के बाद पार्टी के अलग-अलग गुटों के नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर साथ आने के संकेत दिए हैं। लेकिन 25 सितंबर के चंडीगढ़ प्रदर्शन में चन्नी और पायलट की गैरमौजूदगी ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया कि क्या पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद वास्तव में खत्म हुए हैं या फिलहाल सिर्फ सार्वजनिक मंच पर एकता दिखाई जा रही है?

























