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GMADA Case: ED का दावा- सिसोदिया और सत्येंद्र जैन लेते थे बड़े फैसले, ₹10,000 करोड़ के नुकसान का आरोप

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GMADA Case में ED की कार्रवाई और मनीष सिसोदिया व सत्येंद्र जैन
GMADA मामले में ED की कार्रवाई के बीच सिसोदिया और सत्येंद्र जैन की कथित भूमिका को लेकर जांच

पंजाब में Greater Mohali Area Development Authority यानी GMADA से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन की कथित भूमिका को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ED का कहना है कि दोनों नेता GMADA अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठकें करते थे और मास्टर प्लान, जमीन की नीलामी, अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े अहम फैसलों पर चर्चा होती थी।

ED के मुताबिक, जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे इनपुट मिले हैं जिनके आधार पर उसका आरोप है कि नई नीलामी, GMADA की ओर से जमीन खरीदने और मुआवजा तय करने जैसे फैसले सत्येंद्र जैन के निर्देश पर अनौपचारिक रूप से लिए गए। हालांकि, ये अभी जांच एजेंसी के आरोप हैं और इनसे किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी स्वतः साबित नहीं होती।

₹10,000 करोड़ के संभावित नुकसान का ED का दावा

ED ने GMADA की बिना बिकी जमीन की आरक्षित कीमतों (Reserve Price) में कथित हेरफेर की भी जांच की है। एजेंसी का दावा है कि नीलामी से पहले आरक्षित कीमतों को कथित तौर पर कम किया गया, जिससे GMADA और पंजाब सरकार को करीब ₹10,000 करोड़ के संभावित नुकसान की आशंका है। Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, ED ने अभी ऐसा सबूत सार्वजनिक नहीं किया है जिससे यह स्थापित हो कि पूरा ₹10,000 करोड़ का नुकसान वास्तव में हो चुका है।

26 ठिकानों पर ED की कार्रवाई

यह कार्रवाई Tirupati Infraprojects से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत हुई। ED ने दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में कुल 26 ठिकानों पर तलाशी और सर्वे की कार्रवाई की। जांच में GMADA और पंजाब सरकार के Housing and Urban Development Department से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल हैं।

ED की जांच में Tirupati Infraprojects के अलावा Remigate Buildestate, MB Infrabuild, Mera Baba Reality Associates और Mera Baba Infrastructure जैसी कंपनियों से जुड़े मामलों को भी देखा जा रहा है। एजेंसी कथित तौर पर जमीन अधिग्रहण, प्रॉपर्टी नीलामी, मास्टर प्लान में बदलाव और निजी डेवलपर्स को दी गई रियायतों की जांच कर रही है।

चंडीगढ़ के सेक्टर-39 वाले घर को लेकर भी ED का दावा

ED ने आरोप लगाया है कि GMADA की कुछ महत्वपूर्ण फाइलें अधिकारियों द्वारा PUDA भवन से बाहर ले जाकर चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित एक मकान में बैठकों के लिए लाई जाती थीं। एजेंसी का दावा है कि इन बैठकों में सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और जैन के OSD अमरेंद्र झा से जुड़े लोग GMADA के अहम मामलों पर चर्चा करते थे।

Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, ED ने सेक्टर-39 स्थित सत्येंद्र जैन से जुड़े सरकारी बंगले में भी तलाशी ली थी और वहां पहुंचने पर ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया था।

AAP ने ED के आरोपों को बताया गलत

ED के आरोपों को आम आदमी पार्टी ने खारिज किया है। AAP का कहना है कि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन का GMADA की परियोजनाओं, कामकाज या आधिकारिक मामलों में कोई रोल नहीं था और पंजाब में उनकी भूमिका राजनीतिक थी। पार्टी ने ED के आरोपों को झूठा, निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

AAP ने ED की कार्रवाई और GMADA कार्यालय में तलाशी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, पंजाब सरकार की ओर से अधिकारियों को कथित तौर पर हिरासत में रखने के आरोपों पर हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त वारंट अधिकारी ने अधिकारियों को अवैध रूप से हिरासत में रखे जाने की पुष्टि नहीं की, जिसके बाद राज्य सरकार ने अपनी याचिका वापस ले ली।

आगे क्या?

GMADA मामले में ED की जांच जारी है। फिलहाल एजेंसी जमीन अधिग्रहण, नीलामी, मास्टर प्लान में बदलाव, मुआवजे और निजी रियल एस्टेट कंपनियों को कथित लाभ पहुंचाने से जुड़े दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच कर रही है। सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं; मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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