
मुंबई: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत से जुड़े मामले में नाम सामने आने के बाद महाराष्ट्र के नेता आदित्य ठाकरे ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है और इसलिए उन्हें इन आरोपों पर जवाब देने की जरूरत नहीं लगती।
आदित्य ठाकरे का यह बयान बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा दिशा सालियन की मौत के मामले में CBI जांच का निर्देश दिए जाने के बाद सामने आया है।
‘मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं’
पत्रकारों से बातचीत के दौरान आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनका दिशा सालियन मामले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब किसी मामले से उनका कोई लेना-देना ही नहीं है तो वह उस पर जवाब क्यों दें।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। ठाकरे ने कहा कि जो लोग BJP को पसंद नहीं आते या उसकी राजनीति के लिए चुनौती बनते हैं, उन्हें निशाना बनाया जाता है।
आदित्य ठाकरे ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों से उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और यही वजह है कि वह ऐसे आरोपों को महत्व नहीं देना चाहते।
नितेश राणे ने उठाए सवाल
इस मामले में महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने इससे पहले आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों को लेकर सवाल उठाए थे। राणे का कहना था कि अगर किसी व्यक्ति का दिशा सालियन की मौत से कोई संबंध नहीं है, तो उसे सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए।
राणे ने यह भी दावा किया कि वह शुरुआत से ही दिशा सालियन की मौत को आत्महत्या नहीं मानते रहे हैं। उन्होंने कहा कि CBI जांच के जरिए मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
हालांकि, ये आरोप और दावे हैं और जांच के निष्कर्ष आने तक इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI जांच का दिया निर्देश
दिशा सालियन की मौत को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में तब आया जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI को FIR दर्ज करने और मौत से जुड़े हालात की जांच करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने मालवणी पुलिस स्टेशन को मामले से संबंधित रिकॉर्ड CBI को सौंपने के लिए भी कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अदालत के सामने लगाए गए आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जा सकता।
अदालत के मुताबिक, किसी व्यक्ति को आरोपी मानने के लिए जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर उसके खिलाफ पर्याप्त संदेह या आधार होना जरूरी है।
CBI को वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश
हाई कोर्ट ने CBI से कहा कि मामले की जांच के लिए अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया जाए। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई आपराधिक मामला सामने नहीं आता है, तो CBI सक्षम अदालत के समक्ष उचित समरी रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान दिशा सालियन के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और जांच से जुड़े कुछ पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
हाई कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि परिवार के आरोपों के बावजूद Accidental Death Report (ADR) दर्ज की गई थी। अदालत के समक्ष यह भी बात सामने आई कि दिशा सालियन की मौत के कई साल बाद तक उनके परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ADR की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।
अब CBI जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दिशा सालियन की मौत की परिस्थितियों को लेकर लगाए गए विभिन्न दावों में कितनी सच्चाई है।





















