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पाकिस्तान डरता है इस भारतीय फाइटर जेट से! ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका

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पाकिस्तान डरता है इस भारतीय फाइटर जेट से! ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका
पाकिस्तान डरता है इस भारतीय फाइटर जेट से! ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की कार्रवाई में राफेल के साथ-साथ Su-30MKI की भूमिका भी काफी अहम रही। 7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। सरकारी जानकारी के मुताबिक, पूरी कार्रवाई करीब 22 मिनट में पूरी की गई और 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसी ऑपरेशन से जुड़ी चर्चाओं में Su-30MKI की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता, हथियार ले जाने की क्षमता और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन में इसकी भूमिका खास तौर पर सामने आई है। बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर इस्तेमाल किए गए हथियारों में Su-30MKI से दागी गई ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का भी उल्लेख सामने आया है।

22 मिनट में 9 आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। भारत ने पाकिस्तान और PoK में मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया। उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार, कुल 9 लक्ष्यों पर कार्रवाई की गई और यह अभियान करीब 22 मिनट में पूरा हुआ। इनमें बहावलपुर और मुरीदके जैसे प्रमुख ठिकाने भी शामिल थे। बहावलपुर को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि यह जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े प्रमुख ठिकानों में शामिल था। रिपोर्टों के मुताबिक, इस लक्ष्य पर Su-30MKI से ब्रह्मोस और Rafale से SCALP जैसे स्टैंड-ऑफ हथियारों के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है।

Su-30MKI क्यों है भारतीय वायुसेना का अहम फाइटर?

Su-30MKI भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण मल्टीरोल फाइटर जेट्स में से एक है। इसकी खासियत सिर्फ इसकी गति नहीं, बल्कि लंबी दूरी, भारी हथियार ले जाने की क्षमता और विभिन्न मिशनों में इस्तेमाल करने की क्षमता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Su-30MKI को ब्रह्मोस मिसाइल से लैस किया जा सकता है। जून 2026 में ब्रह्मोस एयरोस्पेस के एक अधिकारी ने बताया था कि करीब 40 Su-30MKI पहले ही ब्रह्मोस से इंटीग्रेट किए जा चुके हैं। इस कॉम्बिनेशन से भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी से सटीक हमला करने की क्षमता मिलती है।

राफेल के साथ Su-30MKI ने बढ़ाई स्ट्राइक क्षमता

ऑपरेशन सिंदूर को केवल किसी एक फाइटर जेट की सफलता के तौर पर देखना सही नहीं होगा। अभियान में Rafale और Su-30MKI समेत कई प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया। सरकारी और अन्य उपलब्ध रिपोर्टों में 22 मिनट की कार्रवाई के दौरान दोनों प्रकार के लड़ाकू विमानों की भूमिका का उल्लेख मिलता है। यानी ऑपरेशन की ताकत सिर्फ किसी एक विमान में नहीं, बल्कि फाइटर जेट्स, लंबी दूरी के हथियार, खुफिया जानकारी और निगरानी नेटवर्क के एक साथ काम करने में थी।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया पर भी उठे सवाल

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की एयर डिफेंस और प्रतिक्रिया क्षमता को लेकर कई दावे और विश्लेषण सामने आए। हालांकि, किसी एक प्लेटफॉर्म को पाकिस्तान की प्रतिक्रिया में देरी का सीधा कारण बताने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना ने नेटवर्क आधारित क्षमताओं और स्टैंड-ऑफ हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे भारतीय विमानों को लक्ष्य के बेहद करीब जाने की जरूरत कम हुई। यही आधुनिक एयर वॉरफेयर में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फायदा माना जाता है।

Su-30MKI और ब्रह्मोस की जोड़ी क्यों खास?

Su-30MKI और ब्रह्मोस का संयोजन भारत की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करता है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है और Su-30MKI इसे हवा से लॉन्च करने में सक्षम है। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भी ब्रह्मोस-लैस Su-30MKI की भूमिका चर्चा में रही। इससे यह साफ होता है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ फाइटर जेट की स्पीड या ताकत ही मायने नहीं रखती, बल्कि सेंसर, इंटेलिजेंस, हथियार और कमांड नेटवर्क के बीच तालमेल ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

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