पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को लेकर देश में नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक सरकार ने कुछ पेट्रोल पंपों से लिए गए नमूनों की जांच के आधार पर दावा किया कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है। यह निर्धारित 20 प्रतिशत के स्तर से काफी अधिक है। हालांकि, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने इन दावों को खारिज करते हुए जांच की प्रक्रिया और नमूने लेने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
7 नवंबर को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस मामले पर अपना पक्ष रखा। मंत्रालय के मुताबिक, तेल कंपनियों की ओर से देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जांचे गए 893 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।
कर्नाटक सरकार ने क्या दावा किया?
कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने बताया था कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से पेट्रोल के नमूने एकत्र कर निजी प्रयोगशाला में जांच कराई गई थी।
इस जांच में कुछ नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 26 से 31.2 प्रतिशत तक होने का दावा किया गया। इनमें इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम से जुड़े पेट्रोल पंपों के नमूने भी शामिल बताए गए।
राज्य सरकार ने निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलने के आरोपों पर तेल कंपनियों से जवाब मांगा था।
तेल कंपनियों ने क्यों खारिज किया 31 प्रतिशत का दावा?
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने संयुक्त रूप से कहा कि कर्नाटक सरकार की ओर से जारी जांच के नतीजे निर्धारित तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार प्रमाणित नहीं हैं।
कंपनियों का कहना है कि अक्टूबर में नमूने लेते समय उनके प्रतिनिधि मौजूद नहीं थे। इसके अलावा उन्हें जांच से जुड़े सभी दस्तावेज, नमूनों की जानकारी और संबंधित प्रयोगशाला रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
कंपनियों ने कहा कि नमूने लेने, सुरक्षित रखने और जांच के लिए भेजने की एक निर्धारित प्रक्रिया है। इसलिए किसी भी नतीजे को स्वीकार करने से पहले उसका निर्धारित मानकों के अनुसार सत्यापन जरूरी है।
893 नमूनों की जांच में क्या सामने आया?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो और पेट्रोल पंपों से कुल 893 नमूने लिए गए थे।
इनकी जांच भारतीय मानक ब्यूरो के निर्धारित मानक IS 17021 के अनुसार की गई। मंत्रालय के मुताबिक, सभी 893 नमूनों में इथेनॉल की मात्रा 19 से 21 प्रतिशत के बीच पाई गई।
कर्नाटक के 56 नमूनों की जांच में भी इथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही। इनका औसत 19.30 प्रतिशत बताया गया।
अब संयुक्त जांच की मांग
तेल कंपनियों ने इस विवाद को स्पष्ट करने के लिए संयुक्त रूप से नमूने लेने और स्वतंत्र जांच कराने का प्रस्ताव रखा है।
कंपनियों का कहना है कि जांच ऐसी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए जिसमें नमूने लेने से लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण तक सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी हो और नतीजों का स्वतंत्र सत्यापन किया जा सके।
E20 पेट्रोल को लेकर क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
भारत में E20 पेट्रोल का मतलब ऐसे पेट्रोल से है जिसमें निर्धारित मानक के अनुसार 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित होता है। इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है।
लेकिन कर्नाटक में सामने आए दावों के बाद पेट्रोल की गुणवत्ता, जांच प्रक्रिया और वाहन चालकों पर संभावित असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल 31 प्रतिशत इथेनॉल वाले दावे और तेल कंपनियों की जांच रिपोर्ट के बीच मतभेद बना हुआ है। इस विवाद का अंतिम समाधान पारदर्शी और संयुक्त जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।




























