राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले CJP प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने के साथ सार्वजनिक परिवहन और मोबाइल इंटरनेट को लेकर भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। इन फैसलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित न हो।
Cockroach Janta Party (CJP) और अन्य संगठनों की ओर से प्रस्तावित प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
ट्रेन रद्द होने से यात्रियों की बढ़ सकती है परेशानी
प्रदर्शन से पहले रेलवे सेवाओं में बदलाव की खबर सामने आई है। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर निर्धारित समय के दौरान पहुंचने वाली कई ट्रेनों को रद्द किया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में 245 ट्रेनों के रद्द होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, यात्रियों को सलाह है कि वे किसी सामान्य घोषणा पर निर्भर रहने के बजाय अपनी ट्रेन का नंबर डालकर रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से परिचालन की स्थिति जांचें।
मेट्रो के 57 स्टेशनों पर प्रवेश-निकास को लेकर अलर्ट
दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास रोकने की योजना ने भी यात्रियों की चिंता बढ़ाई। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी की।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद करने के बजाय जरूरत के अनुसार नियंत्रित करने पर जोर दिया। अदालत ने अधिकारियों को यातायात संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने और लोगों की परेशानी कम करने के निर्देश दिए।
जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट बंद करने का आदेश
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले एक सीमित क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का आदेश जारी किए जाने की रिपोर्ट है। इसके तहत 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक जंतर-मंतर के आसपास निर्धारित चार किलोमीटर के क्षेत्र में प्रतिबंध लागू किया जाना था।
यह आदेश सभी मोबाइल इंटरनेट तकनीकों पर लागू होने की बात कही गई। इससे प्रभावित क्षेत्र के निवासियों और वहां से गुजरने वाले लोगों को डिजिटल सेवाओं में परेशानी हो सकती है।
चिल्ला बॉर्डर पर BSF और पुलिस की तैनाती
दिल्ली-नोएडा चिल्ला बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए BSF और पुलिस बलों की तैनाती की खबर भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में आवाजाही को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए।
राजधानी के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। प्रशासन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संभावित भीड़ को नियंत्रित करना है।
प्रदर्शन की अनुमति और सुरक्षा को लेकर विवाद
दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही थी। वहीं, CJP के आयोजकों ने प्रदर्शन जारी रखने का रुख अपनाया। ऐसे में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की आशंका को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी कहा कि सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध आनुपातिक होने चाहिए और सार्वजनिक परिवहन के कारण आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो, रेलवे, यातायात और इंटरनेट सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर नजर रहेगी। यात्रियों को घर से निकलने से पहले आधिकारिक ट्रैवल एडवाइजरी और सेवा संबंधी अपडेट जांचने चाहिए।

























