भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए सिंधु नदी के पानी को लेकर भारत को चेतावनी दी।
शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को उनका देश “act of war” मानेगा।
UNGA में फिर उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत के उस फैसले की आलोचना की, जिसके तहत सिंधु जल संधि को अप्रैल 2025 में “abeyance” में रखा गया था। पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाता रहा है।
पाकिस्तान का कहना है कि सिंधु नदी प्रणाली उसके लिए जीवनरेखा है और भारत को पानी के प्रवाह को रोकने या मोड़ने का अधिकार नहीं है। पाकिस्तान सरकार ने हाल में अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं और सिंधु जल संधि को लेकर अपने पक्ष को दोहराया है।
भारत-पाकिस्तान के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। दशकों तक दोनों देशों के बीच कई बड़े विवादों और सैन्य संघर्षों के बावजूद यह समझौता लागू रहा।
हालांकि, अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में कई बड़े बदलाव किए। इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को “abeyance” में रखने का फैसला किया।
इसी घटनाक्रम के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ा और मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर का भी हुआ जिक्र
शहबाज शरीफ ने UNGA भाषण में 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का भी संदर्भ दिया। भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर को पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंकवादी ढांचे के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सिंधु जल संधि भारत-पाकिस्तान संबंधों का एक प्रमुख विवादित मुद्दा बन गई है।
सिंधु जल संधि पर कानूनी विवाद भी जारी
इस मामले में अगस्त 2026 में हेग स्थित Permanent Court of Arbitration (PCA) से भी फैसला आया। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने संधि से जुड़े विवाद में भारत के एकतरफा तौर पर संधि को “abeyance” में रखने के कदम को लेकर पाकिस्तान के पक्ष में कई निष्कर्ष दिए।
भारत ने हालांकि इस प्रक्रिया और फैसले की वैधता/अधिकारिता को स्वीकार नहीं किया है और अपने संप्रभु निर्णयों पर अपना रुख कायम रखा है।
भारत का स्टैंड क्या है?
भारत की ओर से लगातार यह रुख सामने आया है कि पाकिस्तान के साथ संबंधों में आतंकवाद का मुद्दा केंद्रीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले कह चुके हैं कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता” और भारत के पानी का इस्तेमाल भारत के हित में होना चाहिए।
इसी संदर्भ में बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने भी सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान का वीडियो साझा कर पाकिस्तान के ताजा बयान पर प्रतिक्रिया दी।
आगे क्या?
शहबाज शरीफ के ताजा बयान के बाद सिंधु जल संधि एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। एक तरफ पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और अपने जल अधिकारों से जोड़ रहा है, जबकि भारत अपने सुरक्षा हितों और आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुख आधार मानता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि, आतंकवाद और 2025 के सैन्य टकराव से जुड़े मुद्दे भारत-पाकिस्तान संबंधों में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।



























