विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने अपने 15 बिंदुओं वाले जवाब में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, Form 6, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया समेत कई अहम मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की है।
आयोग ने कहा है कि Form 6 में किसी तरह का संशोधन नहीं किया गया है। उसके मुताबिक Form 6 में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। SIR के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला घोषणा-पत्र Form 6 से अलग दस्तावेज है।
ऑनलाइन आवेदन को लेकर भी सफाई
चुनाव आयोग ने माना कि ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी को कुछ लोगों द्वारा Form 6 में संशोधन के तौर पर समझा जा सकता था। आयोग के मुताबिक 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया में Form 6 और घोषणा-पत्र को अलग-अलग दिखाया जाएगा, जैसा कि फिजिकल फॉर्म में होता है।
नाम नहीं होने पर BLO करेंगे मदद
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, उन्हें हर मामले में सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं होगा। बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकते हैं। सुनवाई की जरूरत विशेष मामलों में ही होगी और इसमें ऑनलाइन माध्यम को प्राथमिकता दी जाएगी।
ECINet को लेकर क्या कहा?
हलफनामे में चुनाव आयोग ने ECINet को लेकर भी अपना पक्ष रखा। आयोग के अनुसार ERO के आदेश के बिना ECINet में किसी मतदाता का नाम जोड़ा या हटाया नहीं जा सकता। नियमों के पालन की जांच के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों की समिति बनाए जाने की जानकारी भी दी गई है।
SIR के फैसलों पर आयोग की सफाई
आयोग ने कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों SIR आदेश आयोग के सर्वसम्मत फैसले थे। साथ ही यह भी कहा गया कि फाइलों पर CEC या किसी चुनाव आयुक्त की ओर से की गई टिप्पणियां, सवाल या सुझाव अपने आप में आयोग का अंतिम फैसला नहीं माने जा सकते।
28 जुलाई के आदेश पर भी जवाब
आयोग के अनुसार 28 जुलाई को काम बांटने से संबंधित आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। इसके अगले दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा और 30 जुलाई को संयुक्त निर्देश के बाद उस आदेश को लागू नहीं किया गया।
गोवा और पश्चिम बंगाल का भी जिक्र
हलफनामे में गोवा से जुड़े मतदाता आंकड़ों पर भी स्पष्टीकरण दिया गया। आयोग के मुताबिक सूची से छूटे 97 मतदाताओं में से 88 पहले ही पंजीकृत हो चुके थे, जबकि 6 विदेश में थे और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट था।
पश्चिम बंगाल के मामलों को लेकर आयोग ने कहा कि मतदाताओं को शामिल करने के खिलाफ अपीलें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत राज्य के CEO अधिकारियों द्वारा दाखिल की गई थीं और ये मामले आयोग के सामने नहीं लाए गए थे।
CEC को हटाने की मांग पर EC का जवाब
आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त को रोकने या उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका को कानूनी तौर पर उचित नहीं बताया। आयोग ने कहा कि CEC को हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है।
आयोग ने यह भी कहा कि उसने कभी किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही ऐसा करने की अनुमति दी।




























