हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल खत्म होने के बाद भी कई इलाकों में बिजली संकट को लेकर लोगों की परेशानी चर्चा में है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी समेत कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की खबरों के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को जल्द से जल्द व्यवस्था सामान्य करने के निर्देश दिए हैं।
हड़ताल का मुख्य विरोध हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) द्वारा गुरुग्राम और नूंह के कुछ क्षेत्रों में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के मुद्दे को लेकर था।
कई जिलों में बिजली-पानी की समस्या
हड़ताल के दौरान गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, पानीपत और रोहतक समेत कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने की बात सामने आई। लंबे समय तक बिजली नहीं आने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिजली संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा। कई जगहों पर बिजली पर निर्भर जलापूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
सड़कों पर उतरे लोग
फरीदाबाद और रेवाड़ी में बिजली-पानी की समस्या से परेशान लोगों के सड़क पर उतरने की जानकारी सामने आई। कुछ स्थानों पर लोगों ने रास्ते रोककर तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की।
लगातार बिजली कटौती के कारण स्थानीय स्तर पर लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
CM नायब सैनी ने दिए आपूर्ति बहाल करने के निर्देश
बढ़ती परेशानी के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रभावित क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था जल्द सामान्य करने के निर्देश दिए। बिजली निगम की फील्ड टीमों और बैकअप कर्मचारियों को खराब लाइनों और तकनीकी दिक्कतों को जल्द दूर करने के लिए लगाया गया।
सरकार की ओर से बिजली कर्मचारियों और सरकारी बिजली निगमों की व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की बात भी कही गई है।
निजीकरण के मुद्दे पर सरकार का बड़ा कदम
बिजली संकट के बीच निजीकरण का विवाद भी लगातार सुर्खियों में है। सरकार की ओर से HERC के निजी कंपनी को दिए गए वितरण लाइसेंस के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही गई है।
सरकार इस मामले में कानूनी राय लेकर उच्च न्यायालय का रुख करने की तैयारी में है।
आखिर किस बात को लेकर हुआ विवाद?
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का प्रमुख मुद्दा गुरुग्राम और नूंह के कुछ क्षेत्रों में निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने का विरोध था।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि इससे सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की भूमिका और भविष्य पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले को कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती देने की बात कही जा रही है।
अब आगे क्या?
तीन दिन की हड़ताल समाप्त होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को पूरी तरह सामान्य करना है। सरकार और बिजली निगमों की टीमों के सामने उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करने और बिजली व्यवस्था को स्थिर करने की जिम्मेदारी है।



























