मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब मुस्कान की छोटी बेटी के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बच्ची का जन्म जेल में हुआ था और परिवार की ओर से उसकी जिम्मेदारी लेने को लेकर भी स्थिति चर्चा में है।
इसी बीच मुंबई के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और ब्रांड प्रमोटर फैजान अंसारी ने बच्ची की परवरिश, शिक्षा और अन्य खर्च उठाने की इच्छा जताई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी व्यक्ति की इच्छा जताने भर से बच्ची को गोद लिया जा सकता है?
जवाब है—नहीं।
भारत में Adoption एक कानूनी प्रक्रिया है और बच्चे के सर्वोत्तम हित को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है।
जेल में मां होने से बच्ची अपने आप Adoption के लिए Free नहीं हो जाती
किसी बच्चे के माता-पिता जेल में हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि बच्चा अपने आप किसी दूसरे व्यक्ति को गोद दिया जा सकता है।
बच्चे की स्थिति, माता-पिता की परिस्थितियां, परिवार में उपलब्ध देखभाल, बच्चे की सुरक्षा और कानूनी स्थिति जैसे कई पहलुओं की जांच की जाती है।
यदि बच्चा अनाथ, परित्यक्त या कानून के तहत दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाता है, तभी निर्धारित Adoption प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा जा सकता है।
भारत में Adoption का कानून क्या कहता है?
भारत में बच्चों के दत्तक ग्रहण से जुड़ी प्रमुख व्यवस्था किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा संबंधित Adoption Regulations के तहत संचालित होती है।
कुछ मामलों में हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (HAMA) के तहत भी दत्तक ग्रहण की व्यवस्था लागू हो सकती है। कौन सा कानून लागू होगा, यह बच्चे और परिवार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
अनाथ या परित्यक्त बच्चे के मामले में क्या होता है?
यदि बच्चा अनाथ या परित्यक्त स्थिति में है, तो संबंधित बाल कल्याण समिति (CWC) बच्चे की स्थिति की जांच करती है।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि बच्चे को दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाता है, तभी उसे निर्धारित Adoption प्रणाली के माध्यम से दत्तक ग्रहण के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
CARA की भूमिका क्या है?
केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण यानी CARA भारत में कानूनी Adoption व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दत्तक ग्रहण के इच्छुक लोगों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण, दस्तावेजों की जांच और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं।
इसके बाद पात्रता और बच्चे के हित को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया होती है।
जेल में बंद माता-पिता के बच्चे का क्या होता है?
यदि माता-पिता जेल में हैं और बच्चे की देखभाल के लिए परिवार में कोई उपलब्ध नहीं है, तो बच्चे की सुरक्षा और देखभाल के लिए बाल संरक्षण व्यवस्था सक्रिय हो सकती है।
ऐसी स्थिति में बच्चे की देखभाल, संरक्षण और भविष्य को लेकर संबंधित बाल कल्याण संस्थाएं निर्णय लेती हैं।
यदि बच्चा दत्तक ग्रहण के लिए कानूनी रूप से उपलब्ध नहीं है, तो कोई बाहरी व्यक्ति केवल अपनी इच्छा के आधार पर उसे गोद नहीं ले सकता।
क्या फैजान अंसारी बच्ची को गोद ले सकते हैं?
फैजान अंसारी की ओर से बच्ची की परवरिश और शिक्षा का खर्च उठाने की इच्छा जताए जाने की खबर सामने आई है। लेकिन इच्छा जताना और कानूनी रूप से Adoption मिलना दो अलग-अलग बातें हैं।
यदि वह वास्तव में बच्ची को गोद लेना चाहते हैं, तो उन्हें लागू कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ना होगा। अंतिम निर्णय बच्चे के सर्वोत्तम हित और सक्षम कानूनी प्राधिकरण की प्रक्रिया के अनुसार होगा।
बच्ची के भविष्य में सबसे अहम क्या?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बच्ची को ऐसा सुरक्षित और स्थायी वातावरण मिले, जहां उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखा जा सके।
कानून का मूल उद्देश्य भी बच्चे के सर्वोत्तम हित की रक्षा करना है।




























