
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने हिरासत के दौरान जारी किए गए वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। दीपके का आरोप है कि पुलिस ने घटनाक्रम का अधूरा वीडियो जारी किया। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
संगठन का कहना है कि यदि प्रदर्शन की तारीख तय नहीं की गई तो वह फिर आंदोलन करेगा। यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है।
दादी के निधन की खबर और फोन कॉल को लेकर दीपके का दावा
दिल्ली पुलिस द्वारा रविवार शाम जारी किए गए वीडियो की अवधि 1 मिनट 45 सेकंड बताई गई है। वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की जानकारी देती दिखाई देती हैं। खबर सुनने के बाद दीपके अपना सिर पकड़ लेते हैं। पुलिस की ओर से उन्हें पानी देने और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बस, ट्रेन या फ्लाइट की व्यवस्था करने का विकल्प दिए जाने की बात भी सामने आई थी।
दीपके ने आरोप लगाया कि वीडियो में हिरासत के दौरान हुई पूरी बातचीत नहीं दिखाई गई। उनके मुताबिक, दादी के निधन की खबर मिलने के बाद उन्होंने अपने चचेरे भाई से बात करने के लिए फोन मांगा था, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई।
दीपके ने यह भी दावा किया कि उनके परिवार और वकीलों को लंबे समय तक उनकी हिरासत की जगह की जानकारी नहीं मिली। इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
CJP नेताओं ने थाने पहुंचकर मांगी प्रदर्शन की अनुमति
CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। रांका के अनुसार, संगठन ने पुलिस को लिखित आवेदन देकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी और तारीख तय करने का विकल्प भी दिया।
रांका ने दावा किया कि पुलिस स्टेशन में उनकी वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि DCP कुछ समय के लिए कमरे में आए, लेकिन बातचीत नहीं हुई। रांका के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए पुलिस का पक्ष जरूरी है।
एयरपोर्ट पर हिरासत से शुरू हुआ विवाद
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। तीनों जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे।
रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद उन्हें रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, शांति भंग नहीं करने की एक साल की शर्त भी रखी गई थी। इस शर्त की सटीक कानूनी स्थिति की पुष्टि आदेश की प्रति से की जानी चाहिए।
SIR विवाद पर CEC के इस्तीफे की मांग
CJP और कुछ विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं। इसी सिलसिले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी और 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन प्रस्तावित था।
दिल्ली पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने और हिरासत में लेने की घटनाओं के बाद अब CJP ने फिर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
अब दिल्ली पुलिस के जवाब पर नजर
CJP के 24 घंटे के अल्टीमेटम और अभिजीत दीपके के आरोपों के बाद दो मुद्दे अहम हैं—जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर पुलिस क्या निर्णय लेती है और हिरासत के वीडियो पर उठाए गए सवालों का क्या जवाब देती है।
फिलहाल, दीपके के आरोपों और पुलिस के सार्वजनिक वीडियो को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और उपलब्ध दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
























