
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को हुई घटना ने दुनिया भर में एविएशन सिक्योरिटी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उड़ान के दौरान को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया और कथित तौर पर विमान का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की। विमान उस समय सऊदी अरब के एयरस्पेस में था।
घटना के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक भारी गिरावट आई। कैप्टन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया।
3 अक्टूबर को UAE के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जांच में को-पायलट द्वारा आतंकी कृत्य को अंजाम देने के प्रयास की बात सामने आई है। हालांकि जांच में घटना के पूरे मकसद, संभावित संपर्कों और किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर अभी पड़ताल जारी है।
अगर कैप्टन कॉकपिट का दरवाजा नहीं खोल पाते तो क्या होता?
यह इस घटना से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल है। इसका कोई निश्चित जवाब नहीं दिया जा सकता, क्योंकि वास्तविक स्थिति इस बात पर निर्भर करती कि उस समय विमान का नियंत्रण किसके पास रहता, अन्य पायलटों को कॉकपिट तक पहुंच मिलती या नहीं और यात्रियों-क्रू को स्थिति का पता कब चलता।
हालांकि, अगर कॉकपिट में मौजूद हमलावर नियंत्रण हासिल कर लेता और अंदर मौजूद दूसरे पायलट को प्रभावी ढंग से विमान चलाने से रोक देता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। आधुनिक यात्री विमानों में कॉकपिट के दरवाजे सुरक्षा के लिए मजबूत और नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था वाले होते हैं। इसलिए बाहर मौजूद यात्रियों या क्रू के लिए तुरंत अंदर पहुंचना आसान नहीं होता।
इसी वजह से इस घटना में कैप्टन द्वारा कॉकपिट का दरवाजा खोल पाना और यात्रियों तथा अन्य क्रू सदस्यों का अंदर पहुंचना घटनाक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने भी इस घटना के बाद “insider threat” यानी विमान के अंदर मौजूद किसी अधिकृत व्यक्ति से पैदा होने वाले खतरे पर चर्चा शुरू की है।
विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने संभाला मोर्चा
इस घटना में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। फ्लाइट में दो अतिरिक्त पायलट भी यात्री के रूप में मौजूद थे। एविएशन में इसे deadheading कहा जाता है, जिसमें किसी पायलट को उसकी अगली ड्यूटी या ऑपरेशन के लिए यात्री के रूप में विमान से भेजा जाता है।
जब कॉकपिट की स्थिति बिगड़ी तो इन अतिरिक्त पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, कैप्टन के कॉकपिट का दरवाजा खोलने के बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को नियंत्रित किया और अतिरिक्त पायलटों ने विमान को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यही वजह है कि घटना में केवल कैप्टन की प्रतिक्रिया ही नहीं, बल्कि विमान में मौजूद अन्य प्रशिक्षित पायलटों और यात्रियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
करीब 30 सेकंड में विमान हजारों फीट नीचे आया
घटना के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, विमान करीब 16,000 फीट से अधिक नीचे आया और यह गिरावट लगभग 30 सेकंड से कुछ अधिक समय में हुई। इसके बाद स्थिति पर काबू पाया गया।
यह घटना उस समय हुई जब विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। विमान में 170 से अधिक लोग सवार थे और अधिकांश यात्री इजरायली नागरिक थे।
को-पायलट की नागरिकता क्यों चर्चा में आई?
घटना के बाद को-पायलट की राष्ट्रीयता भी चर्चा का विषय बन गई। जांच में आरोपी को ओमान का नागरिक बताया गया है। ओमान के इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं।
इसी वजह से यह सवाल उठाया गया कि क्या इजरायल जाने वाली उड़ानों में काम करने वाले पायलटों की राष्ट्रीयता को लेकर कोई विशेष नियम लागू है।
शुरुआती रिपोर्टों में इजरायल के परिवहन मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से कहा गया कि Flydubai के इजरायल में संचालन से जुड़े समझौते में ऐसे देशों के नागरिक पायलटों पर शर्त थी जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध हैं। इसी आधार पर मामले की जांच की मांग उठी।
लेकिन बाद में जांच से परिचित सूत्रों ने Jerusalem Post को बताया कि UAE-Israel bilateral aviation agreement में ऐसी स्पष्ट राष्ट्रीयता-आधारित शर्त नहीं थी। इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या सिर्फ पायलट की Nationality से उड़ान पर रोक लगती है?
इस घटना से एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—विमान, एयरलाइन, ऑपरेटर और पायलट की राष्ट्रीयता अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं।
किसी देश के एयरस्पेस में किसी विमान के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसी तरह किसी एयरलाइन को किसी खास देश में संचालन की अनुमति अलग नियमों के तहत मिलती है। लेकिन इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि उस एयरलाइन के हर विदेशी नागरिक पायलट को उस देश के लिए उड़ान भरने से प्रतिबंधित किया गया है।
Flydubai मामले में भी यही प्रश्न जांच के केंद्र में है कि इजरायल के लिए उड़ान भरने वाले पायलटों पर वास्तव में कौन-सी राष्ट्रीयता संबंधी शर्त लागू थी और उसका पालन कैसे किया गया।
भारत-पाकिस्तान मामले को कैसे समझें?
भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में भी एयरस्पेस प्रतिबंध और पायलट की नागरिकता को एक ही चीज नहीं माना जाना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान से जुड़े विमानों और ऑपरेटरों पर एयरस्पेस संबंधी प्रतिबंध लगाए हैं। लेकिन किसी विदेशी एयरलाइन में काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिक पायलट की स्थिति अलग कानूनी प्रश्न हो सकती है।
यदि कोई पाकिस्तानी नागरिक किसी UAE, यूरोपीय या अन्य विदेशी एयरलाइन में काम करता है, तो केवल उसकी नागरिकता के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह हर परिस्थिति में भारत आने वाली उस एयरलाइन की उड़ान नहीं चला सकता। इसके लिए उस समय लागू एयरस्पेस, वीजा, इमिग्रेशन, सुरक्षा और क्रू-क्लीयरेंस नियम देखना जरूरी होगा।
इसलिए “पाकिस्तानी पायलट भारत में विमान नहीं उड़ा सकता” जैसा सामान्य निष्कर्ष सही नहीं होगा।
भारत में पाकिस्तानी नागरिकों पर अलग नियम भी लागू हो सकते हैं
विमानन नियमों के अलावा किसी विदेशी पायलट को किसी देश में प्रवेश और वहां काम करने के लिए अलग-अलग इमिग्रेशन और सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता है।
इसका अर्थ है कि किसी विदेशी एयरलाइन के विमान के एयरस्पेस में प्रवेश की अनुमति और उस विमान के क्रू सदस्य के देश में प्रवेश की अनुमति दो अलग-अलग विषय हो सकते हैं।
इसी अंतर को Flydubai मामले में उठे सवालों को समझते समय भी ध्यान में रखना जरूरी है।
कॉकपिट सिक्योरिटी पर फिर शुरू हुई बहस
9/11 के बाद दुनिया भर में कॉकपिट सुरक्षा को काफी मजबूत किया गया। इसका मूल उद्देश्य बाहरी व्यक्ति को कॉकपिट तक पहुंचने से रोकना था।
लेकिन Flydubai की घटना ने एक अलग तरह के खतरे को सामने ला दिया—अगर खतरा कॉकपिट के अंदर मौजूद अधिकृत व्यक्ति से पैदा हो तो सुरक्षा व्यवस्था कैसे काम करती है?
AP की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद एविएशन विशेषज्ञों ने इसी “insider threat” को लेकर सवाल उठाए हैं। मजबूत कॉकपिट दरवाजा बाहरी हमलावर को रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन अंदर से पैदा होने वाले खतरे की स्थिति में स्थिति अलग हो सकती है।
कैप्टन स्मित मच्छर ने कैसे बचाई जान?
रिपोर्टों के अनुसार कैप्टन स्मित मच्छर गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इससे यात्रियों और क्रू सदस्यों को अंदर पहुंचने का मौका मिला।
इसके बाद यात्रियों ने हमलावर को काबू करने में मदद की और विमान में मौजूद अतिरिक्त पायलटों ने विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
दुबई के क्राउन प्रिंस ने भी अस्पताल में कैप्टन से मुलाकात कर उनके साहस की सराहना की है।
क्या इस घटना के बाद एविएशन नियम बदलेंगे?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कौन-से नियम बदले जाएंगे। UAE की जांच में घटना के कारण, मकसद और संभावित कनेक्शन की पड़ताल जारी है।
UAE विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच UAE के अधिकार क्षेत्र में की जा रही है और अधिकारियों ने लोगों से आधिकारिक जानकारी आने तक अटकलों और अपुष्ट सूचनाओं से बचने को कहा है।
फिलहाल इस घटना से तीन बड़े सवाल सामने आए हैं—कॉकपिट के अंदर मौजूद व्यक्ति से पैदा होने वाले खतरे को कैसे रोका जाए, पायलटों की सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में अलग-अलग देशों के सुरक्षा नियमों का समन्वय कैसे किया जाए।

























